रांची: झारखंड के चतरा जिले में स्थित सीसीएल की प्रमुख कोयला परियोजनाओं मगध और आम्रपाली की सुरक्षा व्यवस्था अब केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जिम्मे होगी। कोयला चोरी और अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से यहां ‘जीरो कोल लीकेज’ प्लान लागू किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से मजबूत करते हुए CISF की तैनाती बढ़ाकर करीब 1700 जवानों तक करने की तैयारी है।
बताया गया कि अब तक इन खदानों की सुरक्षा में राज्य पुलिस, सीसीएल और होमगार्ड की भूमिका थी। 19 सितंबर को CISF के महानिदेशक प्रवीर रंजन की मौजूदगी में नई सुरक्षा व्यवस्था की औपचारिक शुरुआत की गई। इस दौरान अधिकारियों को कोयले की चोरी और अवैध परिवहन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
कोयला चोरी रोकने पर विशेष फोकस
मगध और आम्रपाली परियोजनाएं देश की प्रमुख ओपनकास्ट कोयला खदानों में शामिल हैं। आम्रपाली परियोजना से प्रतिदिन करीब 70 हजार टन कोयले के उत्पादन का उल्लेख किया गया है। इन परियोजनाओं से बड़े पैमाने पर होने वाले कोयला कारोबार को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है।
आम्रपाली में फिलहाल करीब 200 CISF जवानों की तैनाती की गई है। आने वाले समय में इस संख्या को बढ़ाकर लगभग 1700 करने की योजना है। सुरक्षा अभियान की निगरानी के लिए DIG स्तर के अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई है।
CISF डीजी ने अधिकारियों से कहा कि कोयले की अवैध निकासी और तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाए। उन्होंने ग्रामीण इलाकों, जंगलों और प्रमुख सड़कों के आसपास अवैध कोयला भंडारण या परिवहन की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा। बैठक में MMDR एक्ट के प्रावधानों के प्रभावी पालन पर भी जोर दिया गया।
ड्रोन और GPS से होगी निगरानी
नई व्यवस्था में तकनीक का भी बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। खनन क्षेत्र की निगरानी के लिए ड्रोन सर्विलांस, वाहनों की GPS ट्रैकिंग और वेइंग ब्रिज की निगरानी को इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर से जोड़ा गया है।
CISF ने स्थानीय जिला प्रशासन, पुलिस और CCL प्रबंधन के साथ समन्वय बनाकर कार्रवाई करने पर जोर दिया है। मकसद खदान से निकलने वाले कोयले की आवाजाही पर नजर रखना और चोरी या अवैध परिवहन की संभावनाओं को कम करना है।
नई सुरक्षा व्यवस्था के तहत खदानों से लेकर परिवहन मार्गों तक निगरानी का दायरा बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कोयला सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी स्तर पर लापरवाही न हो।
