बोकारो: झारखंड के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने संशोधित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) यानी MMDR कानून को देशहित में बताया है। बोकारो दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रमुख खनिजों पर अलग-अलग तरह के अतिरिक्त कर और शुल्क का असर खनिज की कीमत तथा उससे जुड़े उद्योगों की लागत पर पड़ता है।
मरांडी ने कहा कि महंगे खनिज का असर आगे चलकर कोयला और लौह अयस्क से जुड़े उद्योगों पर पड़ सकता है। उनके मुताबिक, उत्पादन लागत बढ़ने पर उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होती है और इसका असर रोजगार पर भी पड़ सकता है।
पूरे देश में समान व्यवस्था की बात
मरांडी ने कहा कि संशोधित कानून केवल झारखंड से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि प्रमुख खनिज वाले सभी राज्यों पर लागू होने वाली व्यवस्था है। उनका कहना है कि एक समान व्यवस्था से खनन क्षेत्र में स्थिरता आएगी और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
केंद्र सरकार भी MMDR संशोधन को प्रमुख खनिज क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया बदलाव बता चुकी है। सरकार के अनुसार, संशोधन के बाद राज्यों के
