रांची/दुमका। संथाल परगना में अवैध खनन और खनिज कारोबार को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हैं। दुमका में मयूराक्षी नदी से जुड़े इलाकों में कथित अवैध बालू कारोबार के संचालन को लेकर कारोबारी अमर मंडल का नाम सामने आने का दावा किया गया है। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के मुताबिक, बालू के इस कारोबार में कई लोगों के जुड़े होने की बात कही जा रही है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अमर मंडल ने बालू कारोबार में किसी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है।
पुराने चालानों के इस्तेमाल का आरोप
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कथित अवैध बालू को वैध दिखाने के लिए पुराने डंप से जुड़े चालानों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बताया जाता है कि रानेश्वर क्षेत्र में झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (जेएसएमडीसी) से संबंधित एक टेंडर के जरिए संचालित व्यवस्था की आड़ में नदी के आसपास बालू का कारोबार किया जा रहा है।
मयूराक्षी नदी के आसपास स्थित बनियाग्राम, सिलाजोड़, सामपुर, परिहारपुर, एकतला और नौरांगी जैसे गांवों में बालू उठाव और भंडारण की गतिविधियों का स्थानीय लोगों ने दावा किया है।
इन दावों के मुताबिक, नदी से बालू निकालकर अलग-अलग स्थानों पर जमा किया जाता है और फिर ट्रकों में लोड कर भेजा जाता है। कुछ स्थानीय लोगों ने इस नेटवर्क को अमर मंडल से जुड़े लोगों से जोड़ने का आरोप लगाया है। हालांकि, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
ट्रकों की कथित पासिंग का भी दावा
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि बालू लदे ट्रकों को आगे भेजने के लिए कथित तौर पर पासिंग व्यवस्था चलती है। एक ट्रक बालू की कीमत 50 से 55 हजार रुपये के आसपास बताए जाने के साथ करीब 30 हजार रुपये तक कथित पासिंग राशि लिए जाने का दावा किया गया है।
इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अमर मंडल ने बालू कारोबार से किया इनकार
अमर मंडल से जब इस संबंध में उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने अपने कारोबार को क्रशर, लोडिंग और ट्रांसपोर्ट से संबंधित बताया। उन्होंने बालू कारोबार में शामिल होने के आरोप से साफ इनकार किया।
उनसे बातचीत के बाद कथित बालू कारोबार से जुड़े कुछ लोगों द्वारा संवाददाता से संपर्क किए जाने की बात भी सामने आई है।
कई अन्य लोगों के नाम भी चर्चा में
स्थानीय स्तर पर कथित नेटवर्क से जुड़े कुछ अन्य लोगों के नाम भी सामने आने की बात कही जा रही है। इनमें खान, बसंत, सुब्रतो और पाल के नाम शामिल बताए गए हैं।
हालांकि, इन लोगों की कथित भूमिका को लेकर भी कोई स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। शकील खान ने बताया कि वह अब अमर मंडल के साथ काम नहीं करते हैं और बालू कारोबार में उनकी कोई भूमिका नहीं है।
कोयला मामले से जुड़ी ईडी जांच
अमर मंडल का नाम इससे पहले कथित अवैध कोयला परिवहन से जुड़े एक मामले में भी सामने आ चुका है। 20 जनवरी 2019 को पोड़ैयाहाट थाना क्षेत्र में बिना वैध दस्तावेज के कोयला ले जा रहे एक ट्रक को पकड़े जाने के बाद थाना कांड संख्या 7/2019 दर्ज किया गया था।
पुलिस जांच के बाद अमर मंडल सहित अन्य लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। इसी मामले के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ECIR/RNZO/08/2023 दर्ज कर कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू की।
बाद में अमर मंडल को निचली अदालत से इस मामले में बरी कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट का रुख करते हुए ईडी की कार्रवाई और ECIR को समाप्त करने की मांग की थी।
तलाशी में नकदी और संपत्ति दस्तावेज मिलने की ईडी की जानकारी
ईडी ने हाईकोर्ट के समक्ष बताया था कि 21 नवंबर 2025 को अमर मंडल से जुड़े परिसरों में तलाशी की गई थी। एजेंसी के अनुसार, तलाशी के दौरान करीब 85 लाख रुपये नकद और 134 संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज मिले थे।
ईडी के मुताबिक इन दस्तावेजों में गिफ्ट डीड, लीज डीड और सेल डीड शामिल थे। एजेंसी ने अदालत को यह भी बताया कि जांच के दौरान अमर मंडल से जुड़े बैंक खातों में लगभग 8.94 करोड़ रुपये के लेन-देन का पता चला।
ईडी ने इन संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन के स्रोत की जांच को आवश्यक बताया था। इन दावों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
हाईकोर्ट ने ईडी की जांच पर रोक लगाने से इनकार किया
अमर मंडल की ओर से अदालत में यह तर्क दिया गया था कि जिस मूल कोयला मामले के आधार पर ईडी ने ECIR दर्ज की, उसमें उन्हें निचली अदालत से बरी किया जा चुका है। इसलिए ईडी की आगे की कार्रवाई को भी समाप्त किया जाना चाहिए।
झारखंड हाईकोर्ट ने 1 सितंबर 2026 को उनकी याचिका खारिज कर दी। अदालत के समक्ष ईडी ने तलाशी में मिली नकदी, संपत्ति संबंधी दस्तावेज और बैंक खातों में हुए लेन-देन का विवरण रखा था।
फैसले के बाद ईडी की जांच जारी रहने का रास्ता खुला है। एजेंसी कथित तौर पर संपत्तियों, नकदी और वित्तीय लेन-देन के स्रोत की जांच आगे बढ़ा सकती है।
अदालत ने यह भी कहा कि ECIR ईडी का आंतरिक दस्तावेज है और केवल ECIR के आधार पर इस चरण पर जांच को रद्द नहीं किया जा सकता।
