रांची: झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में खाद्य एवं जन वितरण से संबंधित योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए बड़ी राशि जारी की है। खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने प्रचार-प्रसार के लिए 2 करोड़ 64 लाख 89 हजार 400 रुपये आवंटित किए हैं।
यह राशि राज्य के विभिन्न जिलों के जिला आपूर्ति पदाधिकारियों के लिए जारी की गई है। इसके माध्यम से लोगों को जन वितरण प्रणाली (PDS) और सरकार की अन्य कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जागरूक किया जाएगा। प्रचार अभियान में सेमिनार, प्रशिक्षण कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक, होर्डिंग और पंपलेट जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा।
जिला स्तर पर होगा सम्मान कार्यक्रम
योजना के तहत प्रत्येक जिला मुख्यालय में एक दिवसीय कार्यशाला सह सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। इसमें बेहतर काम करने वाले जन वितरण प्रणाली के दुकानदारों और लाभुकों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही संबंधित योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के संबंध में जानकारी दी जाएगी।
आपूर्ति अधिकारियों के लिए दो दिन की ट्रेनिंग
प्रखंड स्तर पर सहायक गोदाम प्रबंधकों और प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसमें PDS से जुड़े कार्यों और विभिन्न योजनाओं के संचालन को लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर तरीके से हो सके।
हर प्रखंड में पांच नुक्कड़ नाटक
सरकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक आसान तरीके से पहुंचाने के लिए प्रत्येक प्रखंड के प्रमुख बाजारों और हाट में पांच-पांच नुक्कड़ नाटक कराए जाएंगे। इसके अलावा जिला मुख्यालय में दो तथा हर प्रखंड मुख्यालय में एक प्रचार होर्डिंग लगाया जाएगा।
विभागीय निर्देश के अनुसार योजनाओं और उनके लाभ से संबंधित पंपलेट भी प्रकाशित कराए जाएंगे। इनके जरिए लोगों को पात्रता और सरकारी सुविधाओं की जानकारी देने का प्रयास किया जाएगा।
2026-27 के लिए 12 करोड़ का बजट
खाद्य एवं जन वितरण विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रचार-प्रसार, सेमिनार और प्रशिक्षण सहित विभिन्न गतिविधियों के लिए कुल 12 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। इसी प्रावधान के तहत फिलहाल 2.64 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई है। आवश्यकता के अनुसार शेष राशि बाद में उपलब्ध कराई जाएगी।
राशि के खर्च की निगरानी की जिम्मेदारी
जारी राशि की निकासी और खर्च की जिम्मेदारी संबंधित जिले के जिला आपूर्ति पदाधिकारी की होगी। वहीं जिले के उपायुक्त को इस राशि का नियंत्री अधिकारी बनाया गया है।
खर्च की गई राशि का सत्यापन महालेखाकार, झारखंड से कराया जाएगा। सत्यापन के बाद इसकी रिपोर्ट संबंधित विभाग को भेजनी होगी।
