रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के लिए निर्धारित समयसीमा को कम से कम एक महीने बढ़ाने की मांग की है। पार्टी नेताओं ने शुक्रवार को इस संबंध में राज्य के एडिशनल मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार को ज्ञापन सौंपा।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार की अनुपस्थिति में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों और प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं से निर्वाचन विभाग को अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के साथ उपाध्यक्ष डॉ. राजेश गुप्ता, सतीश पाल मुंजनी, महासचिव लालकिशोर नाथ शाहदेव, सूर्यकांत शुक्ला और संजय कुमार शामिल रहे।
नोटिस और सुनवाई के आंकड़ों का दिया हवाला
कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में कहा कि प्रारूप मतदाता सूची जारी होने के बाद जिन मामलों में नोटिस जारी किए गए हैं, उनकी तुलना में अब तक हुई सुनवाई की संख्या काफी कम है।
पार्टी ने उदाहरण देते हुए बताया कि धनबाद जिले में 4,45,901 नोटिस जारी किए जाने थे, जबकि उपलब्ध ताजा आंकड़ों के अनुसार अभी तक सिर्फ 36,381 मामलों की सुनवाई पूरी हुई है।
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक इस अंतर को देखते हुए दावा-आपत्ति और सुनवाई के लिए कम से कम एक अतिरिक्त महीने का समय दिया जाना जरूरी है, ताकि सभी पात्र नागरिकों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिल सके।
ग्राम सभाओं में ड्राफ्ट रोल दोबारा पढ़ने की मांग
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि पार्टी के आग्रह पर 15 अगस्त को ग्राम सभाओं में प्रारूप मतदाता सूची पढ़कर सुनाने की प्रक्रिया की गई थी। उन्होंने इसके लिए निर्वाचन विभाग का आभार जताते हुए इसे दोबारा कराने का अनुरोध किया।
पार्टी का कहना है कि इससे मतदाता सूची में छूटे नाम, गलतियां या अन्य आपत्तियों की पहचान करने में ग्रामीणों को मदद मिलेगी और वे समय रहते अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
सुनवाई के लिए भीड़ कम करने का सुझाव
कांग्रेस ने सुनवाई की व्यवस्था को लेकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई। पार्टी नेताओं का आरोप है कि नोटिस पाने वाले कई लोगों को घंटों कतार में खड़े रहने के बाद भी उसी दिन सुनवाई नहीं मिलती और उन्हें अगले दिन बुलाया जाता है।
कांग्रेस ने सुझाव दिया कि प्रतिदिन उतने ही लोगों को सुनवाई के लिए बुलाया जाए, जितने मामलों का निपटारा उसी दिन किया जा सकता है। इससे मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकेगा।
राजनीतिक दलों की आपत्तियों का विवरण सार्वजनिक करने की मांग
कांग्रेस ने फॉर्म-7 के माध्यम से प्राप्त आपत्तियों के आंकड़ों को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की है। पार्टी ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने फॉर्म-7 की कुल संख्या सार्वजनिक की है, लेकिन यह जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए कि अलग-अलग राजनीतिक दलों की ओर से कितनी आपत्तियां दाखिल की गई हैं।
पार्टी का कहना है कि इससे पूरी प्रक्रिया को लेकर लोगों के बीच पारदर्शिता और विश्वास बढ़ेगा।
नए मतदाताओं के पंजीकरण की समयसीमा बढ़ाने की मांग
कांग्रेस नेताओं ने 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं के मतदाता सूची में नाम जोड़ने का मुद्दा भी उठाया। पार्टी के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं को शामिल करने के लिए अब तक करीब 4.39 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं।
कांग्रेस का दावा है कि यह संख्या अनुमानित तौर पर 20 लाख से अधिक होनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि कोई भी पात्र युवा मतदान के अधिकार से वंचित न हो, इसके लिए फॉर्म-6 जमा करने की अंतिम तारीख बढ़ाना आवश्यक है।
नाम हटाने से पहले दोनों पक्षों को सुनने की मांग
कांग्रेस ने फॉर्म-7 से संबंधित मामलों में भी स्पष्ट प्रक्रिया अपनाने की मांग की। पार्टी नेताओं के अनुसार, किसी मतदाता का नाम हटाने का निर्णय लेने से पहले आवेदन करने वाले व्यक्ति और जिस मतदाता का नाम हटाने का प्रस्ताव है, दोनों को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने निर्वाचन विभाग से इन सभी मांगों पर विचार करते हुए पुनरीक्षण प्रक्रिया की समयसीमा बढ़ाने और सुनवाई की व्यवस्था को अधिक सुचारू बनाने का आग्रह किया है।
