Thursday, September 10, 2026

Bihar Solar Scheme: 78 हजार सरकारी स्कूलों में लगेंगे सोलर पैनल, 800 करोड़ से ज्यादा का होगा खर्च.

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पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों को बिजली के मामले में अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ी योजना तैयार की है। शिक्षा विभाग राज्य के करीब 78 हजार सरकारी विद्यालयों में सोलर पैनल लगाने की तैयारी कर रहा है। इस योजना पर 800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है।

सरकार की योजना है कि सौर ऊर्जा के जरिए स्कूलों की बिजली संबंधी जरूरतों को पूरा किया जाए। इससे नियमित बिजली आपूर्ति में मदद मिलने के साथ विद्यालयों पर आने वाला बिजली बिल और रखरखाव का खर्च भी घट सकता है। पूरी परियोजना को तीन चरणों में लागू किए जाने की योजना है।

69 हजार स्कूलों में लगाए जाएंगे 2 किलोवाट के सिस्टम

योजना के तहत राज्य के करीब 69 हजार प्राथमिक और मध्य विद्यालयों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जाएगा। इन स्कूलों में लगभग 2 किलोवाट क्षमता वाले सोलर पैनल लगाए जाने हैं।

इनमें से प्रत्येक विद्यालय में सोलर सिस्टम स्थापित करने पर करीब 50 हजार से 80 हजार रुपये तक खर्च आने का अनुमान है। तैयार होने वाली बिजली का इस्तेमाल स्कूलों में पंखे, लाइट और मोटर पंप जैसे उपकरणों के संचालन में किया जा सकेगा।

यह पहल जल-जीवन-हरियाली अभियान और नवीन ऊर्जा संवर्धन नीति के तहत आगे बढ़ाई जा रही है।

9 हजार हाई स्कूल भी योजना में शामिल

राज्य के करीब 9 हजार उच्च माध्यमिक विद्यालयों को भी इस योजना में शामिल किया गया है। इन स्कूलों की जरूरत को देखते हुए यहां 3 से 5 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल लगाने का प्रस्ताव है।

एक स्कूल में इस व्यवस्था पर लगभग 1 लाख से 2.50 लाख रुपये तक खर्च हो सकता है। परियोजना के शुरुआती चरण में उच्च माध्यमिक विद्यालयों को प्राथमिकता देने की योजना है।

सौर ऊर्जा उपलब्ध होने से स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर, इंटरनेट राउटर और विज्ञान प्रयोगशालाओं जैसे संसाधनों को बिजली कटौती की स्थिति में भी संचालित करने में मदद मिलेगी।

एक स्कूल से रोज 10 से 25 यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान

प्रस्तावित सोलर सिस्टम से स्कूल की क्षमता और परिस्थितियों के अनुसार रोजाना लगभग 10 से 25 यूनिट बिजली पैदा होने का अनुमान है। इससे विद्यालय की दैनिक बिजली आवश्यकता का बड़ा हिस्सा पूरा किया जा सकता है।

गर्मी या सर्दी की छुट्टियों के दौरान जब स्कूलों में बिजली की खपत कम होगी, तब अतिरिक्त बिजली को पावर ग्रिड में भेजने की व्यवस्था की जाएगी। इस अतिरिक्त बिजली का वार्षिक हिसाब मार्च में किए जाने की योजना है।

नेट मीटरिंग से बिजली खर्च घटाने की तैयारी

स्कूलों में नेट मीटरिंग की व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके जरिए सोलर सिस्टम से पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दी जा सकेगी। योजना के अनुसार इससे ऊर्जा शुल्क काफी कम या शून्य तक हो सकता है।

हालांकि, स्कूलों को स्वीकृत बिजली लोड के हिसाब से निर्धारित फिक्स्ड चार्ज का भुगतान करना पड़ सकता है। कुल मिलाकर सरकार को उम्मीद है कि सौर ऊर्जा व्यवस्था शुरू होने के बाद विद्यालयों का सालाना बिजली खर्च काफी कम हो जाएगा।

बिजली कटौती के बावजूद पढ़ाई में मिलेगी मदद

ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण कई बार डिजिटल पढ़ाई प्रभावित होती है। सोलर सिस्टम लगने के बाद स्मार्ट टीवी, कंप्यूटर और इंटरनेट उपकरण चलाने में सुविधा हो सकती है।

इसके अलावा सौर ऊर्जा से समरसेबल पंप चलाने में भी मदद मिलेगी। इससे स्कूलों की नल-जल व्यवस्था और शौचालयों में पानी की उपलब्धता बेहतर करने में सहयोग मिल सकता है।

छुट्टियों के दौरान अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजने से ऊर्जा खर्च में और कमी आने की संभावना है। साथ ही सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन कम करने और विद्यार्थियों के बीच स्वच्छ ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

सरकार का लक्ष्य स्कूलों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के अनुसार सरकारी स्कूलों में सौर ऊर्जा का विस्तार कर उन्हें बिजली के मामले में अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से एक तरफ स्कूलों की ऊर्जा जरूरत पूरी करने में सहायता मिलेगी, वहीं दूसरी ओर लंबे समय में बिजली पर होने वाला खर्च भी कम किया जा सकेगा। योजना लागू होने के बाद राज्य के हजारों सरकारी विद्यालयों में स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ेगा।

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