Thursday, September 10, 2026

श्रीनगर में होगा ‘मैं वापस आऊंगा’ का प्रीमियर, इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल से कश्मीर में सिनेमा को नई उम्मीद.

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श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में आयोजित पहले इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के बीच घाटी में फिल्मी गतिविधियों को लेकर उत्साह बढ़ा है। इसी फेस्टिवल के दौरान वेदांग रैना और शरवरी वाघ अभिनीत फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ का प्रीमियर श्रीनगर के INOX में आयोजित किया जाएगा।

फेस्टिवल में फिल्म जगत से जुड़े कई चर्चित चेहरों ने हिस्सा लिया और कश्मीर में सिनेमा की संभावनाओं, स्थानीय कहानियों तथा फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा की।

कश्मीर में फिर फिल्म निर्माण की संभावनाओं पर चर्चा

अभिनेता-निर्माता संजय सूरी ने घाटी में दोबारा फिल्म निर्माण को लेकर बन रहे माहौल को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि लंबे अंतराल के बाद कश्मीर में फिल्मों और फिल्मकारों को लेकर उत्साह नजर आ रहा है।

सूरी के मुताबिक कश्मीर में स्थानीय जीवन, संस्कृति और लोगों से जुड़ी कई ऐसी कहानियां हैं, जिन्हें बड़े पर्दे तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्थानीय युवाओं को फिल्म निर्माण से जोड़ने के लिए वर्कशॉप और फिल्म स्कूल जैसी पहल उपयोगी साबित हो सकती हैं।

सुनिधि चौहान ने कश्मीर से जुड़ी यादें साझा कीं

फेस्टिवल में प्लेबैक सिंगर सुनिधि चौहान ने कश्मीर से अपने संगीत संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने फिल्म ‘मिशन कश्मीर’ के चर्चित गीत ‘बुमरो बुमरो’ से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं और बताया कि कश्मीर आने की उनकी पुरानी इच्छा भी इस यात्रा के दौरान पूरी हुई।

उन्होंने घाटी की सांस्कृतिक और भावनात्मक गहराई की चर्चा करते हुए फेस्टिवल में मिले स्वागत और अपनापन का अनुभव साझा किया। चौहान ने भविष्य में कश्मीर में कॉन्सर्ट करने की इच्छा भी जताई। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ‘बुमरो बुमरो’ से जुड़ी कुछ पंक्तियां गाकर माहौल को संगीतमय बना दिया।

वेदांग रैना ने बताया कश्मीर से अपना पारिवारिक रिश्ता

अभिनेता वेदांग रैना के लिए भी श्रीनगर का यह कार्यक्रम व्यक्तिगत रूप से खास रहा। उन्होंने बताया कि उनके परिवार की जड़ें श्रीनगर के रैनावाड़ी इलाके से जुड़ी हैं। रैना ने कश्मीर को अपना घर बताते हुए कहा कि वह घाटी को और करीब से जानना चाहते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें थोड़ी-बहुत कश्मीरी भाषा समझ आती है, लेकिन वह इसे धाराप्रवाह बोल नहीं पाते।

शरवरी वाघ ने कहानी और संस्कृति की ताकत पर दिया जोर

अभिनेत्री शरवरी वाघ ने कहा कि सिनेमा अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के लोगों को जोड़ने का माध्यम बन सकता है। उनके अनुसार अच्छी कहानियां दर्शकों तक पहुंचने में भाषा की सीमाओं को पार कर सकती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों और स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देने में ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

घाटी में फिल्म इंडस्ट्री को लेकर बढ़ी उम्मीद

पहले इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और ‘मैं वापस आऊंगा’ के श्रीनगर प्रीमियर को कश्मीर में सिनेमा की गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है। फेस्टिवल के दौरान फिल्मकारों और कलाकारों की मौजूदगी से स्थानीय स्तर पर फिल्म निर्माण, कलाकारों के लिए अवसर और कश्मीर की कहानियों को बड़े मंच तक पहुंचाने की संभावनाओं पर चर्चा को गति मिली है।

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