Tuesday, September 8, 2026

SEBI के नए ETF नियम लागू, गोल्ड-सिल्वर और इक्विटी ETF की ट्रेडिंग में आए बड़े बदलाव.

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नई दिल्ली: एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में कारोबार करने वाले निवेशकों के लिए 7 सितंबर 2026 से नए नियम लागू हो गए हैं। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने ETF की बाजार कीमत को उसके वास्तविक मूल्य यानी NAV के ज्यादा करीब रखने और ट्रेडिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई बदलाव किए हैं।

नए नियमों के तहत ETF के बेस प्राइस, प्राइस बैंड और गोल्ड-सिल्वर ETF की शुरुआती ट्रेडिंग प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इससे बाजार में कम लिक्विडिटी की वजह से ETF की कीमत और उसके वास्तविक मूल्य के बीच बनने वाले अंतर को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अब T-2 NAV से तय नहीं होगा बेस प्राइस

SEBI की नई व्यवस्था के तहत ETF का बेस प्राइस अब दो कारोबारी दिन पुराने NAV यानी T-2 NAV से निर्धारित नहीं किया जाएगा।

इसके बजाय 7 सितंबर से किसी ETF का शुरुआती बेस प्राइस पिछले कारोबारी दिन के अंतिम 30 मिनट में दर्ज कारोबार के वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) के आधार पर तय होगा। इससे अगले दिन की ट्रेडिंग उस कीमत के ज्यादा करीब शुरू हो सकेगी, जिस स्तर पर पिछले सत्र में वास्तविक कारोबार हुआ था।

SEBI ने आगे की व्यवस्था के लिए भी समयसीमा तय की है। 1 अप्रैल 2027 से ETF के बेस प्राइस को सीधे पिछले कारोबारी दिन के क्लोजिंग NAV से जोड़ दिया जाएगा।

इक्विटी और डेट ETF के लिए बदला प्राइस बैंड

नए नियमों में ETF के लिए पहले लागू एक समान 20 प्रतिशत प्राइस बैंड की व्यवस्था में बदलाव किया गया है।

अब इक्विटी और डेट ETF की शुरुआत 10 प्रतिशत के प्राइस बैंड के साथ होगी। बाजार की स्थिति को देखते हुए 15 मिनट के कूलिंग-ऑफ अंतराल के बाद इस सीमा को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जा सकेगा और यह अधिकतम 20 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

वहीं, लिक्विड और ओवरनाइट ETF के लिए 5 प्रतिशत का निश्चित प्राइस बैंड लागू रहेगा।

गोल्ड और सिल्वर ETF में प्री-ओपन ऑक्शन

सोने और चांदी की कीमतों पर घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी असर पड़ता है। इसी वजह से गोल्ड और सिल्वर ETF के लिए SEBI ने अलग व्यवस्था लागू की है।

इन ETF में दिन की शुरुआत सुबह 9 बजे से 9:15 बजे के बीच प्री-ओपन कॉल ऑक्शन से होगी। इस प्रक्रिया में खरीद और बिक्री की मांग के आधार पर शुरुआती कीमत निर्धारित की जाएगी।

इन ETF के लिए शुरुआती प्राइस बैंड 6 प्रतिशत रखा गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में होने वाले बदलाव को ध्यान में रखते हुए इसे 3-3 प्रतिशत के चरणों में आगे बढ़ाया जा सकता है। इसमें किसी निश्चित अधिकतम सीमा का प्रावधान नहीं किया गया है।

इंट्राडे ट्रेडर्स को रखना होगा विशेष ध्यान

नए नियमों का मुख्य असर ETF में सक्रिय रूप से कारोबार करने वाले निवेशकों पर देखने को मिल सकता है। खासकर बाजार खुलने के शुरुआती समय में कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी होगा।

लंबी अवधि के निवेशकों के लिए इन बदलावों से किसी बड़े नकारात्मक प्रभाव की उम्मीद नहीं है। वहीं, इंट्राडे या एक्टिव ट्रेडिंग करने वालों के लिए शुरुआती कारोबार में मार्केट ऑर्डर के बजाय लिमिट ऑर्डर का इस्तेमाल अधिक सावधानीपूर्ण तरीका हो सकता है।

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