पटना: बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 को लेकर राज्य सरकार ने अभ्यर्थियों के हित में कई अहम फैसलों की जानकारी दी है। सरकार के मुताबिक TRE-4 परीक्षा अब एक ही चरण में आयोजित करने की मांग स्वीकार कर ली गई है। इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार, अभ्यर्थियों की शिकायतों और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े कई मुद्दों पर भी सहमति बनी है।
27 अगस्त को शिक्षा विभाग के सचिव की अध्यक्षता में छात्र प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। बैठक में विभिन्न मांगों पर चर्चा के बाद कई प्रस्तावों को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से बैठक में हुए फैसलों की जानकारी साझा की।
TRE-4 अब सिंगल फेज में
TRE-4 शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर सबसे अहम फैसला परीक्षा को एक चरण में आयोजित करने का है। छात्र प्रतिनिधियों की इस मांग पर सरकार ने सहमति जताई है। वहीं, एक अभ्यर्थी-एक परिणाम से संबंधित मामले में भी नियमानुसार आगे की प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया गया है।
परीक्षा सुधार के लिए बनेगी विशेषज्ञ समिति
प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था में सुधार के सुझाव देने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है। प्रस्तावित समिति की अध्यक्षता पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश करेंगे। समिति विभिन्न परीक्षाओं से जुड़ी शिकायतों और सुधार संबंधी सुझावों पर विचार करेगी।
अभ्यर्थी अपनी शिकायतों के समर्थन में उपलब्ध साक्ष्य और सुझाव समिति के सामने रख सकेंगे। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों की समस्याओं के लिए पोर्टल और शिविर
सरकार ने विद्यार्थियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए ‘विद्यार्थी सहयोग पोर्टल’ और ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ शुरू किए हैं। सरकार का कहना है कि इन माध्यमों के जरिए विद्यार्थियों की शिकायतों को निर्धारित समय के भीतर दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
70वीं BPSC और दूसरी परीक्षाएं भी चर्चा में
बैठक में 70वीं BPSC परीक्षा की पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा बिहार कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं को निर्धारित समय पर कराने, 1799 पदों वाली दरोगा भर्ती और सहायक प्राध्यापक भर्ती से पहले BET से संबंधित विषयों को भी परीक्षा सुधार समिति के समक्ष रखने का निर्णय लिया गया।
1799 दरोगा भर्ती पर समिति की रिपोर्ट का इंतजार
1799 पदों वाली दरोगा भर्ती परीक्षा की आगे की प्रक्रिया को समिति की रिपोर्ट से जोड़ने का फैसला लिया गया है। वहीं, बिहार कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं के लिए जल्द कैलेंडर जारी करने और निर्धारित समय के अनुसार परीक्षाएं आयोजित कराने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
लाइब्रेरियन भर्ती को लेकर भी तैयारी
राज्य में रिक्त पुस्तकालयाध्यक्ष पदों को ध्यान में रखते हुए भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर सहमति बनी है। इससे लंबे समय से भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
संविदाकर्मियों के लिए अलग व्यवस्था पर विचार
भर्ती प्रक्रियाओं में संविदा कर्मचारियों को मिलने वाले अंकों और वेटेज के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। इसके लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव है। समिति यह देखेगी कि मौजूदा नियमों के तहत संविदाकर्मियों के लिए अलग कोटे की व्यवस्था की आवश्यकता है या नहीं।
डोमिसाइल और उम्र सीमा पर भी मंथन
बिहार की भर्ती परीक्षाओं में अधिकतम स्तर तक डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग को भी आगे विचार के लिए रखा गया है। इस संबंध में न्यायविदों से प्राप्त सुझावों और लागू नियमों के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं में अधिकतम आयु सीमा से संबंधित मुद्दे पर भी विशेषज्ञ समिति के स्तर पर विचार किया जाएगा।
प्रश्नपत्र और OMR की पारदर्शिता पर जोर
BPSC जैसी भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्र, OMR शीट और उत्तर पुस्तिका से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग पर भी चर्चा हुई। इस प्रस्ताव को भी प्रस्तावित विशेषज्ञ समिति के सामने रखने का फैसला लिया गया है।
पेपर लीक मामलों में जांच जारी
AEDO, सेनेटरी इंस्पेक्टर समेत कुछ परीक्षाओं में पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच को लेकर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) द्वारा नियमानुसार कार्रवाई जारी रहने की जानकारी दी गई। बैठक में प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने पर जोर दिया गया।
मांगों पर सहमति के बाद आंदोलन समाप्त
बैठक में विभिन्न मांगों पर सरकार की ओर से लिए गए फैसलों के बाद छात्र प्रतिनिधिमंडल ने अपना आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया। सरकार की ओर से कहा गया कि अभ्यर्थियों से जुड़े मुद्दों पर आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने का प्रयास जारी रहेगा।
