हेल्थ डेस्क: बारिश के मौसम में नमी, पसीना और गंदे पानी के संपर्क के कारण त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं बढ़ जाती हैं। खुजली, रैशेज, फंगल इंफेक्शन या छोटी चोट को अक्सर लोग सामान्य मानकर छोड़ देते हैं। लेकिन त्वचा पर मौजूद कट, खरोंच या दरार के रास्ते बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर जाएं तो गंभीर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
इसी तरह के संक्रमण में सेल्युलाइटिस भी शामिल है। यह त्वचा की अंदरूनी परत और उसके नीचे मौजूद ऊतकों में होने वाला बैक्टीरियल इंफेक्शन है। शुरुआती स्तर पर प्रभावित हिस्से में लालिमा या सूजन दिखाई दे सकती है, लेकिन संक्रमण बढ़ने पर समस्या गंभीर हो सकती है।
क्या होता है सेल्युलाइटिस?
सेल्युलाइटिस आमतौर पर बैक्टीरिया के कारण होने वाला त्वचा का संक्रमण है। यह शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है, हालांकि हाथ और पैरों में इसके मामले अधिक देखे जाते हैं।
अगर संक्रमण का समय पर उपचार न हो तो यह आसपास के हिस्सों में फैल सकता है और कुछ गंभीर मामलों में रक्त या लिम्फ सिस्टम तक पहुंचने का जोखिम रहता है। इसलिए इसके संभावित लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
इन संकेतों पर दें ध्यान
सेल्युलाइटिस की स्थिति में प्रभावित त्वचा पर कई तरह के बदलाव दिखाई दे सकते हैं, जैसे:
- त्वचा लाल या असामान्य रंग की दिखाई देना
- प्रभावित जगह पर गर्माहट महसूस होना
- सूजन और दर्द
- जलन या त्वचा में खिंचाव
- लालिमा का धीरे-धीरे आसपास फैलना
- बुखार, ठंड लगना या कमजोरी महसूस होना
लक्षण तेजी से बढ़ रहे हों या बुखार जैसे सामान्य शारीरिक लक्षण भी साथ हों, तो डॉक्टर से जल्द संपर्क करना उचित है।
किन लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत?
सेल्युलाइटिस किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में इसका जोखिम बढ़ सकता है। इनमें शामिल हैं:
- डायबिटीज
- खुले घाव या बार-बार होने वाली त्वचा की चोट
- कीड़े या जानवर के काटने से हुई चोट
- एक्जिमा जैसी त्वचा संबंधी समस्याएं
- पैरों में लंबे समय से सूजन
- कमजोर प्रतिरोधक क्षमता
- अधिक उम्र
जिन लोगों को पहले से सेल्युलाइटिस हो चुका है, उन्हें त्वचा पर नई चोट या संक्रमण होने पर विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
बारिश के गंदे पानी से रहें सावधान
मानसून के दौरान कई जगहों पर बारिश का पानी सीवेज या गंदगी के संपर्क में आ जाता है। ऐसे पानी में मौजूद बैक्टीरिया त्वचा पर कट या घाव के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।
यदि किसी कारण से गंदे पानी से होकर गुजरना पड़े तो उसके बाद पैरों और प्रभावित त्वचा को साफ पानी और साबुन से अच्छी तरह साफ करना चाहिए। छोटी चोट को भी साफ करके ढकना जरूरी है।
घाव को बार-बार छूने, खुजलाने या उस पर दबाव डालने से बचें।
पैरों की देखभाल क्यों जरूरी?
सेल्युलाइटिस पैरों और हाथों में भी हो सकता है। मानसून में नमी के कारण पैरों में फंगल संक्रमण, त्वचा का फटना और छोटी चोटें होने की संभावना बढ़ सकती है। इन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।
डायबिटीज से जूझ रहे लोगों को अपने पैरों की नियमित जांच करनी चाहिए। उंगलियों के बीच, तलवों और एड़ियों पर किसी तरह की दरार, घाव, छाला या लालिमा नजर आए तो उस पर ध्यान दें।
डायबिटीज में पैरों की संवेदनशीलता कम हो सकती है, जिसके कारण छोटी चोट का तुरंत पता नहीं चलता। साथ ही, घाव भरने में भी अधिक समय लग सकता है।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि किसी चोट या त्वचा की समस्या के आसपास लालिमा, गर्माहट, सूजन या दर्द लगातार बढ़ रहा हो, तो चिकित्सकीय सलाह लें। बुखार, कंपकंपी या असामान्य कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर भी देरी नहीं करनी चाहिए।
