नई दिल्ली/रियाद: भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर बातचीत फिर से शुरू हो गई है। पश्चिम एशिया में बने हालात के कारण जून में वार्ता कुछ समय के लिए ठहर गई थी। अब दोनों पक्षों ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
हाल ही में रियाद में भारत के सऊदी अरब स्थित राजदूत विपुल और GCC के महासचिव जसीम मोहम्मद अल-बुदैवी के बीच बैठक हुई। इसमें भारत और खाड़ी देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ आगामी मंत्रिस्तरीय बैठक की तैयारियों पर चर्चा हुई।
छह देशों का समूह है GCC
खाड़ी सहयोग परिषद में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। संगठन की स्थापना 1981 में क्षेत्रीय आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हुई थी।
भारत के लिए GCC का महत्व काफी अधिक है। ऊर्जा, व्यापार, निवेश और भारतीय प्रवासियों के लिहाज से खाड़ी क्षेत्र भारत के प्रमुख साझेदारों में शामिल है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और GCC देशों के बीच कुल व्यापार करीब 178.56 अरब डॉलर रहा। यह भारत के कुल वैश्विक व्यापार का लगभग 15.42 प्रतिशत बताया गया है।
भारत क्या बेचता और क्या खरीदता है?
भारत से खाड़ी देशों को होने वाले निर्यात में चावल, कपड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद, मशीनरी और रत्न एवं आभूषण जैसे सामान प्रमुख हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का GCC देशों को निर्यात करीब 56.87 अरब डॉलर रहा।
इसके मुकाबले खाड़ी देशों से भारत का आयात लगभग 121.68 अरब डॉलर था। इसमें कच्चा तेल, एलएनजी, पेट्रोकेमिकल उत्पाद और सोना प्रमुख वस्तुओं में शामिल हैं।
निवेश के स्तर पर भी खाड़ी देशों की भारत में महत्वपूर्ण भागीदारी है। सितंबर 2025 तक GCC देशों से भारत में 31 अरब डॉलर से अधिक का निवेश होने की जानकारी दी गई है।
FTA से भारतीय कारोबार को क्या फायदा हो सकता है?
प्रस्तावित व्यापार समझौते का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच कारोबार की बाधाओं को कम करना और बाजार तक पहुंच आसान बनाना है। समझौता होने पर कई भारतीय उत्पादों को खाड़ी देशों के बाजार में बेहतर पहुंच मिल सकती है।
इससे खास तौर पर कपड़ा, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान और अन्य निर्यात क्षेत्रों को फायदा मिलने की उम्मीद है। शुल्क में कमी से भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ सकती है।
रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद
भारत और GCC के बीच व्यापार बढ़ने से निर्यात आधारित क्षेत्रों में गतिविधियां तेज हो सकती हैं। इससे कृषि, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और संबंधित उद्योगों में रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है।
हालांकि वास्तविक लाभ समझौते की अंतिम शर्तों, शुल्क में होने वाली कटौती और उसके लागू होने के तरीके पर निर्भर करेगा।
खाड़ी में रहने वाले भारतीयों के लिए भी महत्वपूर्ण
GCC देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। इसलिए भारत-खाड़ी आर्थिक संबंधों का असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। निवेश, श्रमिकों से जुड़े मुद्दे और भारत में भेजी जाने वाली रकम भी इस रिश्ते का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
व्यापार समझौते के जरिए आर्थिक संबंधों के विस्तार से दोनों पक्षों के बीच सहयोग के नए क्षेत्र खुल सकते हैं।
UAE और ओमान के साथ अलग समझौते पहले से
भारत पहले ही संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के साथ अलग-अलग व्यापार समझौते कर चुका है। अब GCC के सभी छह देशों के साथ व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ना भारत की खाड़ी नीति में एक अहम कदम माना जा रहा है।
फिलहाल वार्ता फिर शुरू हुई है और आने वाली मंत्रिस्तरीय बैठक में इसके अगले चरण पर चर्चा होने की उम्मीद है। समझौते की अंतिम शर्तें तय होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों पक्षों को किन क्षेत्रों में कितनी व्यापारिक रियायतें मिलती हैं।
