पटना: बिहार सरकार ने सांसदों और विधायकों के साथ सरकारी अधिकारियों के व्यवहार और समन्वय को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी निर्देशों में जनप्रतिनिधियों के पद और प्रोटोकॉल का सम्मान करने तथा उनके संपर्क और पत्राचार पर समयबद्ध प्रतिक्रिया देने को कहा गया है।
सरकार का उद्देश्य अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद को बेहतर बनाना तथा आम लोगों से जुड़े मामलों के निपटारे में तेजी लाना बताया गया है।
फोन नहीं उठा पाए तो करना होगा कॉल बैक
नए निर्देशों के अनुसार, यदि कोई सांसद या विधायक किसी अधिकारी को फोन करता है तो अधिकारी को यथासंभव उसका जवाब देना होगा।
अगर किसी जरूरी काम या बैठक के कारण अधिकारी फोन रिसीव नहीं कर पाता है, तो उपलब्ध होने के बाद उसे स्वयं संबंधित जनप्रतिनिधि से संपर्क करना होगा। यानी फोन का जवाब देने की जिम्मेदारी अधिकारी की ओर से पूरी करने की अपेक्षा की गई है।
MLA-MP के पत्रों पर भी देनी होगी जानकारी
जनप्रतिनिधियों की ओर से भेजे जाने वाले पत्रों को लेकर भी अधिकारियों को प्रक्रिया का पालन करने को कहा गया है। पत्र प्राप्त होने के बाद संबंधित सांसद या विधायक को इसकी सूचना अथवा प्राप्ति की पुष्टि देने की व्यवस्था रखी गई है।
इसके बाद पत्र में उठाए गए मुद्दे पर हुई कार्रवाई और मामले की वर्तमान स्थिति की जानकारी निर्धारित समयसीमा में लिखित रूप से देने के निर्देश हैं।
कार्यालय आने पर प्रोटोकॉल का ध्यान
अगर कोई सांसद या विधायक किसी सरकारी कार्यालय में किसी विषय को लेकर पहुंचता है, तो अधिकारियों को उनके पद के अनुरूप आवश्यक प्रोटोकॉल और सम्मान सुनिश्चित करना होगा।
सरकार के मुताबिक, निर्वाचित जनप्रतिनिधि जनता और प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण संपर्क माध्यम हैं। इसलिए उनके साथ आधिकारिक संवाद और व्यवहार में निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन जरूरी है।
किन अधिकारियों पर लागू होंगे निर्देश?
इन दिशा-निर्देशों का पालन पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों को करना होगा। संबंधित अधिकारियों को निर्देशों को गंभीरता से लागू करने के लिए कहा गया है।
सरकार की ओर से जारी आदेश में मूल उद्देश्य प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि जनता से जुड़े मामलों पर सूचना और कार्रवाई में अनावश्यक देरी न हो
