नई दिल्ली: महंगाई के बदलते रुझान के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ब्याज दर नीति पर बाजार और कर्ज लेने वालों की नजर बनी हुई है। अगस्त में हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट को फिलहाल 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया। हालांकि, महंगाई में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए आगे ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
RBI की बैठक के मिनट्स से संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक महंगाई के जोखिमों पर करीबी नजर रख रहा है। यदि कीमतों में अपेक्षा से अधिक वृद्धि होती है, तो भविष्य में मौद्रिक नीति को सख्त करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
महंगाई बढ़ने की आशंका
RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने बैठक के दौरान चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में खुदरा महंगाई के बढ़कर करीब 5.9 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना जताई। खाद्य और ईंधन की कीमतों में बदलाव को महंगाई के लिए महत्वपूर्ण जोखिम माना जा रहा है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में औसत महंगाई करीब 2 प्रतिशत रही थी। इस वजह से ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश बनी थी। दूसरी ओर, चालू वित्त वर्ष में कोर महंगाई के औसत स्तर में बढ़ोतरी का अनुमान है।
फिलहाल रेपो रेट में बदलाव नहीं
अगस्त की MPC बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही रखने का फैसला किया गया। यह लगातार चौथी बैठक है, जिसमें केंद्रीय बैंक ने प्रमुख नीति दर में कोई बदलाव नहीं किया है।
RBI ने फिलहाल अपनी नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ रखा है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आने वाले आर्थिक आंकड़ों, महंगाई और विकास की स्थिति को देखते हुए आगे की रणनीति तय करेगा।
होम और कार लोन लेने वालों पर क्या असर?
फिलहाल रेपो रेट में बदलाव नहीं होने के कारण मौजूदा कर्ज की EMI पर इस फैसले का तत्काल कोई अतिरिक्त असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, अगर भविष्य में RBI रेपो रेट बढ़ाता है और बैंक उसका असर लोन की ब्याज दरों पर डालते हैं, तो फ्लोटिंग रेट वाले होम और कार लोन महंगे हो सकते हैं।
ऐसी स्थिति में कर्जदारों की मासिक EMI बढ़ सकती है या समान EMI बनाए रखने पर लोन की अवधि लंबी हो सकती है। नए लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी का मतलब अधिक उधारी लागत हो सकता है।
आगे के फैसले पर महंगाई का असर अहम
आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों, ईंधन, कोर महंगाई और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े आंकड़े RBI के अगले फैसले के लिए महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल केंद्रीय बैंक ने दरों में बदलाव नहीं किया है, इसलिए भविष्य में ब्याज दर बढ़ने की संभावना को एक संभावित परिदृश्य के तौर पर देखना चाहिए, न कि तय फैसला।
कर्ज लेने वालों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी है कि वे अपनी वित्तीय योजना बनाते समय ब्याज दरों में संभावित उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखें।
