Thursday, August 20, 2026

जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं की जांच को लेकर बाबूलाल मरांडी ने सीएम को लिखा पत्र, CBI जांच की मांग.

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रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़ी रद्द परीक्षाओं की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराने की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से जेएसएससी-सीजीएल और जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

मरांडी का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों में भरोसे का संकट पैदा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में हुई जांचों को लेकर भी अभ्यर्थियों और आम लोगों के बीच कई सवाल बने हुए हैं।

सीजीएल मामले की जांच पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बाबूलाल मरांडी ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा से जुड़े मामले में हुई जांच की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। उनका आरोप है कि छात्रों की शिकायतों और सामने आए तथ्यों के बावजूद समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।

उन्होंने कहा कि परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच होती और दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाती, तो अभ्यर्थियों के बीच पैदा हुआ अविश्वास कम किया जा सकता था। मरांडी ने यह भी सवाल उठाया कि परीक्षा रद्द करने का फैसला लेने से पहले शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

सीआईडी की जांच पर भी लगाए आरोप

नेता प्रतिपक्ष ने पत्र में आरोप लगाया कि सीजीएल मामले की जांच के दौरान वास्तविक दोषियों और कथित लाभार्थियों तक पहुंचने के बजाय जांच का दायरा सीमित रहा। उन्होंने कुछ अधिकारियों की भूमिका को लेकर सामने आए आरोपों का भी उल्लेख करते हुए स्वतंत्र जांच की जरूरत बताई।

मरांडी ने कहा कि जिन अधिकारियों या पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनकी जांच उसी संस्था से कराना उचित नहीं होगा। उनके मुताबिक, इससे जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।

जेपीएससी परीक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल

पत्र में जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है। मरांडी ने दावा किया कि इंटरव्यू प्रक्रिया, अभ्यर्थियों के आवंटन और कथित कोडिंग-डिकोडिंग से जुड़े कई सवाल सामने आए हैं।

उन्होंने इन दावों की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि इंटरव्यू बोर्ड में शामिल अधिकारियों और सदस्यों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। साथ ही इंटरव्यू से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की जरूरत बताई।

उन्होंने कहा कि यदि जांच के दौरान किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है, तो उस व्यक्ति को जांच प्रक्रिया से अलग रखा जाना चाहिए, ताकि हितों के टकराव की स्थिति न बने।

रद्द परीक्षाओं की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग

बाबूलाल मरांडी ने पत्र में सरकार की ओर से रद्द की गई परीक्षाओं और संदेह के घेरे में आई अन्य परीक्षाओं की जांच भी सीआईडी के बजाय सीबीआई या किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का सीधा असर हजारों-लाखों युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। इसलिए जांच ऐसी एजेंसी से होनी चाहिए जिस पर अभ्यर्थियों और आम जनता का भरोसा कायम हो सके।

बाबूलाल मरांडी की प्रमुख मांगें

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में नेता प्रतिपक्ष ने मुख्य रूप से ये मांगें रखीं—

  • जेएसएससी-सीजीएल मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए।
  • जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
  • रद्द और संदेह के घेरे में आई परीक्षाओं की जांच स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराने पर विचार किया जाए।
  • संबंधित इंटरव्यू बोर्डों में शामिल सदस्यों और अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाए।
  • इंटरव्यू, अभ्यर्थी आवंटन, कोडिंग-डिकोडिंग और परीक्षा से जुड़े डिजिटल व दस्तावेजी रिकॉर्ड सुरक्षित किए जाएं।
  • जिन अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में है, उन्हें संबंधित जांच से अलग रखा जाए।
  • जांच में यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या अन्य भूमिका सामने आती है तो जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाए।

युवाओं के भविष्य का मामला बताया

मरांडी ने अपने पत्र में कहा कि परीक्षा विवाद केवल कुछ परीक्षाओं तक सीमित विषय नहीं है। यह राज्य के लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा मामला है।

उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि सरकार अभ्यर्थियों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए स्वतंत्र जांच का फैसला करे। उनके अनुसार, पारदर्शी जांच से वास्तविक स्थिति सामने आएगी और प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया में युवाओं का भरोसा दोबारा कायम करने में मदद मिलेगी।

नोट: इस रिपोर्ट में लगाए गए आरोप और दावे बाबूलाल मरांडी द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में व्यक्त किए गए हैं। संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि का दावा नहीं किया गया है।

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