Thursday, August 20, 2026

12 दिन की गिरावट के बाद शेयर बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स 558 अंक चढ़ा.

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मुंबई: लगातार 12 कारोबारी सत्रों की कमजोरी के बाद भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को मजबूत वापसी की। वैश्विक बाजारों में सुधार और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी से निवेशकों का भरोसा बढ़ा, जिसका असर घरेलू बाजार की शुरुआती चाल में दिखाई दिया।

सुबह के कारोबार में सेंसेक्स 558 अंक यानी 0.73% बढ़कर 77,468 के आसपास पहुंच गया। इसी तरह निफ्टी 50 करीब 147 अंक यानी 0.61% की बढ़त के साथ 24,225.45 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। शुरुआती सत्र में आईटी, टेलीकॉम और मेटल कंपनियों के शेयरों में विशेष मजबूती देखने को मिली।

निफ्टी के लिए 24,060 का स्तर अहम

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक निफ्टी के लिए 24,060 का स्तर फिलहाल महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। यदि सूचकांक 24,200-24,260 के दायरे के ऊपर मजबूती बनाए रखता है, तो आगे 24,380 से 24,540 के स्तर की ओर बढ़ने की संभावना बन सकती है।

इसके विपरीत, 24,060 से नीचे कमजोरी आने पर बाजार में फिर दबाव बढ़ सकता है और निफ्टी के 23,575 के आसपास जाने की आशंका जताई जा रही है।

विदेशी और घरेलू निवेशकों की खरीदारी

बाजार में तेजी को संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से भी समर्थन मिला। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयरों में निवेश किया और करीब 407 करोड़ रुपये की खरीदारी की।

घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की गतिविधियां भी बाजार के लिए सकारात्मक रहीं। उन्होंने लगातार सातवें सत्र में खरीदारी जारी रखी और बुधवार को लगभग 3,973 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

वैश्विक बाजारों से भी मिले सकारात्मक संकेत

अमेरिकी बॉन्ड बाजार में नरमी का असर अन्य वैश्विक बाजारों पर भी पड़ा। लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड से जुड़ी लागत को लेकर अमेरिका में संभावित कदमों की खबरों के बीच निवेशकों की धारणा में सुधार देखा गया।

इससे पहले अमेरिकी बाजार भी बढ़त के साथ बंद हुए थे। S&P 500 में 0.21% और Nasdaq में 0.16% की तेजी दर्ज की गई। एशिया के कई बाजारों में भी शुरुआती कारोबार के दौरान सकारात्मक रुख देखने को मिला।

कच्चे तेल की कीमतों पर नजर

भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में फिलहाल सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड करीब 0.33% बढ़कर 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा, जबकि WTI क्रूड लगभग 0.17% की बढ़त के साथ 84.52 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर था।

बाजार की आगे की दिशा तय करने में वैश्विक संकेतों के साथ विदेशी निवेश, बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमत और प्रमुख तकनीकी स्तरों की भूमिका महत्वपूर्ण रह सकती है।

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