मुंबई। सप्ताह के कारोबारी सत्र में बुधवार सुबह घरेलू शेयर बाजार पर दबाव देखने को मिला। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच निवेशक सतर्क नजर आए। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे।
सेंसेक्स और निफ्टी में कमजोरी
शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 273 अंक यानी 0.34 फीसदी नीचे जाकर 77,881 के स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह एनएसई निफ्टी में करीब 81 अंक यानी 0.33 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,390 के नीचे कारोबार करता नजर आया।
बाजार में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक वैश्विक संकेतों और तेल की कीमतों पर नजर बनाए हुए हैं।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 1 फीसदी मजबूत होकर 89.87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। अमेरिकी WTI क्रूड में भी करीब 1.14 फीसदी की तेजी रही और इसकी कीमत लगभग 84.14 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बने घटनाक्रमों का असर तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की महंगी कीमतें भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए चिंता बढ़ा सकती हैं और इससे बाजार की धारणा भी प्रभावित हो सकती है।
मेटल और सरकारी बैंक शेयरों में मजबूती
बाजार के सभी सेक्टरों में एक जैसी स्थिति नहीं रही। शुरुआती कारोबार में निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 0.86 फीसदी ऊपर रहा, जबकि निफ्टी पीएसयू बैंक में लगभग 0.60 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। ऑटो इंडेक्स भी करीब 0.23 फीसदी की मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा।
इसके विपरीत एफएमसीजी सेक्टर पर ज्यादा दबाव रहा। निफ्टी एफएमसीजी करीब 0.64 फीसदी नीचे था। रियल्टी, हेल्थकेयर और आईटी सूचकांकों में भी क्रमशः लगभग 0.58 फीसदी, 0.41 फीसदी और 0.38 फीसदी की गिरावट देखी गई।
FY27 में 8 फीसदी GDP ग्रोथ का अनुमान
शेयर बाजार में कमजोर शुरुआत के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक सकारात्मक अनुमान भी सामने आया है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में देश की आर्थिक विकास दर 8 फीसदी तक पहुंच सकती है।
यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक के 6.7 फीसदी के अनुमान से अधिक है। यदि अर्थव्यवस्था की विकास दर इस स्तर पर रहती है तो कॉरपोरेट आय और कारोबारी गतिविधियों को मजबूती मिलने की उम्मीद की जा सकती है, जिसका सकारात्मक असर आगे चलकर शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है।
