Ranchi: भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातू से शुरू हुई उलगुलान पदयात्रा शनिवार को राजधानी रांची पहुंची। पदयात्रा में शामिल विभिन्न आदिवासी प्रतिनिधियों ने कोकर स्थित भगवान बिरसा मुंडा समाधि स्थल पर पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उनके संघर्ष एवं योगदान को याद किया।
जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारों पर जोर
समाधि स्थल पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अजय टोप्पो, निरंजना हेरेंज टोप्पो, आशुतोष सिंह चेरो, अधिवक्ता राकेश बड़ाईक और राजेश लिंडा समेत कई लोग मौजूद रहे। प्रतिनिधियों ने आदिवासी समाज से अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक होने और जल, जंगल व जमीन की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की।
पदयात्रा से जुड़े लोगों ने कहा कि आदिवासी समाज के सामने जमीन, विस्थापन और रोजगार जैसे कई गंभीर सवाल हैं। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं, जबकि जमीन से जुड़े मुद्दे भी लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं।
अलग झारखंड के आंदोलन के सपनों का किया जिक्र
प्रतिनिधियों ने कहा कि अलग राज्य के गठन के पीछे जिन उम्मीदों और सपनों के साथ पूर्वजों व आंदोलनकारियों ने संघर्ष किया था, उन्हें पूरी तरह हासिल किया जाना अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि इन्हीं मुद्दों को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों को साथ लाने के उद्देश्य से पदयात्रा निकाली गई है।
सरकार के सामने रखी गईं मांगें
उलगुलान पदयात्रा के माध्यम से सरकार के समक्ष आदिवासी-मूलवासी हितों से जुड़ी कई मांगें रखी गईं। इनमें खतियान आधारित स्थानीय नीति, झारखंडियों के लिए प्रभावी नियोजन नीति और सरकारी नौकरियों में आदिवासी-मूलवासी युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग प्रमुख है।
इसके अलावा पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में पेसा के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने, CNT-SPT कानून के उल्लंघन के मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और आदिवासी जमीन से संबंधित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की मांग भी उठाई गई।
पदयात्रा के आयोजकों ने कहा कि इन मुद्दों को लेकर जनजागरूकता बढ़ाने और सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
