Tuesday, August 4, 2026

कांवर यात्रा में क्यों गूंजता है ‘बोल बम’ का जयकारा? जानिए इस परंपरा से जुड़ी मान्यताएं.

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देवघर: सावन के महीने में झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले कांवरियों की यात्रा में सबसे ज्यादा सुनाई देने वाला जयघोष है—‘बोल बम’। सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर देवघर तक करीब 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालु पूरे रास्ते इसी उद्घोष के साथ आगे बढ़ते हैं।

कांवर यात्रा के दौरान श्रद्धालु एक-दूसरे का अभिवादन भी ‘बोल बम’ कहकर करते हैं। कई कांवरिये साथी श्रद्धालुओं को ‘बम’ कहकर संबोधित करते हैं। भक्तों का मानना है कि इस जयघोष से उन्हें मानसिक मजबूती मिलती है और लंबी पैदल यात्रा के दौरान उत्साह बना रहता है।

श्रद्धालुओं के अनुसार, लगातार ‘बोल बम’ का उच्चारण भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था को और गहरा करता है। उनका विश्वास है कि सामूहिक रूप से किए जाने वाले इस जयकारे से यात्रा की कठिनाइयां कम महसूस होती हैं और भक्तों में नई ऊर्जा का संचार होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ‘बम’ शब्द का संबंध भगवान शिव की आराधना से जोड़ा जाता है। धर्म विशेषज्ञों का कहना है कि आध्यात्मिक परंपराओं में इस शब्द को साधना और ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से कांवर यात्रा में इसका विशेष महत्व माना जाता है।

जब श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ को अर्पित करने के लिए निकलते हैं, तब ‘बोल बम’ का उद्घोष उनकी भक्ति, एकाग्रता और सामूहिक भावना को मजबूत करने का माध्यम बन जाता है।

हालांकि ‘बोल बम’ शब्द की उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं और व्याख्याएं मौजूद हैं। इसका कोई एक प्रमाणित मत नहीं है, लेकिन शिवभक्तों के बीच इसकी आस्था सदियों से कायम है। यही कारण है कि सावन के दौरान सुल्तानगंज से देवघर तक का कांवर मार्ग हर साल ‘बोल बम’ के जयकारों से गूंज उठता है।

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