रांची: झारखंड में आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध कई अस्पतालों में सुरक्षा मानकों को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालिया ऑडिट में पता चला है कि राज्य के 36 सूचीबद्ध अस्पतालों के पास फिलहाल वैध फायर सेफ्टी एनओसी (Fire NOC) उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद इन अस्पतालों में मरीजों का उपचार जारी है।
HEM 2.0 के तहत अनिवार्य है सुरक्षा मानकों का पालन
केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना से जुड़े सभी अस्पतालों को HEM 1.0 से HEM 2.0 प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं। नए फ्रेमवर्क के तहत अस्पतालों को सूचीबद्ध रहने के लिए कई अनिवार्य मानकों का पालन करना होगा।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- स्वीकृत भवन योजना
- फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (Fire NOC)
- राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति
- अस्पताल का वैध पंजीकरण
- बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था
- फार्मेसी रजिस्ट्रेशन
- पंजीकृत एंबुलेंस की उपलब्धता
इन शर्तों को पूरा किए बिना अस्पतालों का पंजीकरण या नवीनीकरण संभव नहीं माना गया है।
ऑडिट में सामने आई फायर एनओसी की कमी
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार जिन अस्पतालों के पास फायर एनओसी नहीं मिली, उनमें सबसे अधिक संख्या पूर्वी सिंहभूम जिले की है। इसके अलावा कई अन्य जिलों में भी ऐसे अस्पताल चिन्हित किए गए हैं।
जिलावार स्थिति इस प्रकार है:
- पूर्वी सिंहभूम – 10 अस्पताल
- सरायकेला-खरसावां – 6 अस्पताल
- पश्चिमी सिंहभूम – 5 अस्पताल
- हजारीबाग – 4 अस्पताल
- बोकारो – 4 अस्पताल
- रामगढ़ – 2 अस्पताल
- धनबाद – 1 अस्पताल
- गिरिडीह – 1 अस्पताल
- कोडरमा – 1 अस्पताल
- लोहरदगा – 1 अस्पताल
HEM 2.0 पर माइग्रेशन की प्रक्रिया भी अधूरी
जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने राज्यों को आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों का HEM 2.0 पर माइग्रेशन जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए राज्य सरकार ने भी सभी जिलों को समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करने को कहा था।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक झारखंड के अधिकांश निजी सूचीबद्ध अस्पताल अब भी पुराने HEM 1.0 प्लेटफॉर्म पर ही संचालित हो रहे हैं और HEM 2.0 पर स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
सुरक्षा मानकों के पालन पर रहेगा फोकस
स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में फायर सेफ्टी जैसे सुरक्षा मानकों का पालन मरीजों और कर्मचारियों दोनों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। HEM 2.0 के तहत निर्धारित नियमों का उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों में गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ऐसे में जिन अस्पतालों के दस्तावेज या प्रमाणपत्र लंबित हैं, उन्हें आवश्यक औपचारिकताएं जल्द पूरी करनी होंगी।
