Friday, July 31, 2026

धूम्रपान न करने वालों में भी बढ़ रहा फेफड़ों के कैंसर का खतरा, विशेषज्ञों ने बताए प्रमुख कारण और बचाव के उपाय.

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नई दिल्ली: फेफड़ों के कैंसर को आमतौर पर धूम्रपान से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी केवल धूम्रपान करने वालों तक सीमित नहीं है। हाल के वर्षों में ऐसे लोगों, विशेषकर महिलाओं और युवाओं, में भी फेफड़ों के कैंसर के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है जिन्होंने कभी तंबाकू या सिगरेट का सेवन नहीं किया।

विशेषज्ञों के अनुसार, धूम्रपान न करने वाले लोगों में होने वाला फेफड़ों का कैंसर कई मामलों में जैविक और आनुवंशिक रूप से अलग प्रकृति का हो सकता है। भारत में घरों के भीतर होने वाला वायु प्रदूषण इस बढ़ते जोखिम का एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है।

घर के भीतर का वायु प्रदूषण बना चिंता का विषय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार घर के अंदर की हवा बाहर की तुलना में अधिक प्रदूषित हो सकती है। खराब वेंटिलेशन, खाना पकाने से निकलने वाला धुआं, सेकेंड-हैंड स्मोक, मच्छर भगाने वाली कॉइल, अगरबत्ती, धूप और सुगंधित मोमबत्तियों का अत्यधिक उपयोग घर की वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आज भी कई परिवार लकड़ी, गोबर के उपले और फसल अवशेष जैसे ठोस ईंधनों का उपयोग करते हैं। इनके जलने से निकलने वाले सूक्ष्म कण और हानिकारक रसायन लंबे समय तक फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

WHO के अनुसार घरेलू प्रदूषण भी बड़ा खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, घरेलू वायु प्रदूषण के कारण दुनिया भर में हर वर्ष लाखों लोगों की समय से पहले मृत्यु होती है। इसका संबंध फेफड़ों के कैंसर के अलावा श्वसन संबंधी बीमारियों, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से भी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि साफ ईंधन को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के बावजूद घरेलू प्रदूषण पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और इसे कम करने के लिए जागरूकता तथा बेहतर घरेलू व्यवस्था दोनों जरूरी हैं।

विशेषज्ञों की सलाह

ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से फेफड़ों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए घर के भीतर स्वच्छ वातावरण बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है जितना बाहरी प्रदूषण से बचाव।

फेफड़ों की सुरक्षा के लिए अपनाएं ये उपाय

  • रसोई में पर्याप्त वेंटिलेशन सुनिश्चित करें।
  • खाना बनाते समय चिमनी या एग्जॉस्ट फैन का उपयोग करें।
  • घर के अंदर धूम्रपान पूरी तरह प्रतिबंधित रखें।
  • मच्छर भगाने वाली कॉइल, अगरबत्ती और धुएं वाले उत्पादों का सीमित उपयोग करें।
  • घर में ताजी हवा के आवागमन की व्यवस्था बनाए रखें।
  • लगातार खांसी, सांस लेने में तकलीफ या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई देने पर समय रहते चिकित्सकीय जांच कराएं।

विशेषज्ञों का कहना है कि फेफड़ों के कैंसर से बचाव केवल धूम्रपान छोड़ने तक सीमित नहीं है। घर के भीतर स्वच्छ हवा और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करना भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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