नई दिल्ली: भारत सरकार ने देश में मोबाइल फोन निर्माण को नई गति देने के लिए 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) शुरू की है। पांच साल की इस योजना का उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना है।
योजना की अवधि 1 अप्रैल 2026 से वित्त वर्ष 2030-31 तक रखी गई है। इसके तहत कंपनियों के लिए आवेदन की प्रक्रिया खुली रहेगी। योजना में बड़े पैमाने पर मोबाइल उत्पादन के अलावा भारतीय ब्रांड, डिजाइन, रिसर्च और घरेलू तकनीक को भी प्रोत्साहन देने की व्यवस्था की गई है।
मोबाइल उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, पिछली प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के दौरान देश में करीब 20 लाख करोड़ रुपये मूल्य के मोबाइल फोन का उत्पादन हुआ।
नई योजना के जरिए सरकार उत्पादन को लगभग दोगुना करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। सरकारी अनुमान के अनुसार कुल उत्पादन करीब 39 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। साथ ही मोबाइल निर्यात के लिए करीब 15 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है।
योजना से लगभग 60 हजार प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद भी जताई गई है।
भारतीय मोबाइल ब्रांड्स को मिलेगा अतिरिक्त प्रोत्साहन
नई स्कीम का एक प्रमुख फोकस भारतीय ब्रांड तैयार करना है। इसके लिए पात्र कंपनियों को 5% तक प्रोत्साहन मिलने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
इसके अलावा घरेलू स्तर पर तैयार कंपोनेंट्स के इस्तेमाल और भारतीय डिजाइन व रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त इंसेंटिव का प्रावधान है। इससे सरकार का लक्ष्य केवल मोबाइल असेंबलिंग तक सीमित रहने के बजाय देश में ज्यादा वैल्यू एडिशन करना है।
भारतीय ब्रांड के लिए क्या होंगी शर्तें?
योजना के तहत भारतीय ब्रांड के रूप में पात्रता हासिल करने के लिए कंपनी को कई मानदंड पूरे करने होंगे। इनमें प्रमुख रूप से:
- कंपनी का भारत में पंजीकृत होना जरूरी होगा।
- संबंधित ट्रेडमार्क और बौद्धिक संपदा अधिकार भारत में होने चाहिए।
- कंपनी का प्रबंधन भारतीय नागरिकों के नियंत्रण में होना चाहिए।
- 51% से अधिक हिस्सेदारी भारतीय नागरिकों के पास होनी चाहिए।
- भारत में डिजाइन और रिसर्च से जुड़ी क्षमता विकसित करना जरूरी होगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल किसी विदेशी उत्पाद की नकल करने वाले डिजाइन को प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा। भारतीय ब्रांड के तहत वास्तविक घरेलू डिजाइन और बौद्धिक संपदा को महत्व दिया जाएगा।
घरेलू कंपोनेंट बनाने पर भी मिलेगा फायदा
नई योजना में मोबाइल के स्थानीय उत्पादन के साथ-साथ कंपोनेंट निर्माण को भी बढ़ावा देने की कोशिश है। डिस्प्ले, कैमरा, बैटरी और यूएसबी केबल जैसे हिस्सों को देश में बनाने वाली कंपनियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल सकता है।
इसके लिए उत्पादन में निर्धारित मात्रा में घरेलू कंपोनेंट के इस्तेमाल जैसी शर्तें लागू होंगी। सरकार का उद्देश्य धीरे-धीरे मोबाइल क्षेत्र में घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ाना है।
फिलहाल मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में घरेलू वैल्यू एडिशन करीब 25-28% के आसपास बताया गया है। नई योजना के जरिए इसे और ऊपर ले जाने का लक्ष्य है।
पिछली PLI योजना से आगे बढ़ी नई स्कीम
सरकार के अनुसार पिछली PLI योजना ने भारत में मोबाइल उत्पादन और निर्यात को काफी बढ़ावा दिया। नई व्यवस्था में केवल उत्पादन को प्रोत्साहन देने के बजाय घरेलू वैल्यू एडिशन, भारतीय डिजाइन, रिसर्च और ब्रांड निर्माण को भी अलग-अलग महत्व दिया गया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में देश का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन कई गुना बढ़ा है। मोबाइल फोन का उत्पादन और निर्यात भी इस दौरान तेज गति से बढ़ा है।
भारत अब दुनिया के प्रमुख मोबाइल फोन विनिर्माण केंद्रों में शामिल है और देश में इस्तेमाल होने वाले लगभग 99% से अधिक मोबाइल फोन घरेलू स्तर पर निर्मित होने का दावा सरकार की ओर से किया गया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भी बड़ी वृद्धि
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 2014-15 में करीब 5.4 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में लगभग 48 अरब डॉलर हो गया। मोबाइल फोन देश के प्रमुख निर्यात उत्पादों में शामिल हो चुका है।
सरकार का मानना है कि मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग से विकसित हुई तकनीकी क्षमता और कुशल श्रमबल का इस्तेमाल भविष्य में लैपटॉप, ऑटोमोबाइल, टेलीविजन, मेडिकल उपकरण और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे अन्य क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।
MSME और सप्लाई चेन को भी मिलेगा लाभ
नई योजना का असर केवल मोबाइल कंपनियों तक सीमित रखने की कोशिश नहीं है। सरकार घरेलू कंपोनेंट निर्माता, MSME, कच्चा माल उपलब्ध कराने वाली कंपनियों और सप्लाई चेन से जुड़े कारोबार को भी इसका लाभ पहुंचाना चाहती है।
अगर योजना के लक्ष्यों के अनुसार घरेलू उत्पादन और वैल्यू एडिशन बढ़ता है, तो इससे भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का पूरा इकोसिस्टम मजबूत हो सकता है और वैश्विक बाजार में भारतीय ब्रांड्स की मौजूदगी बढ़ने की संभावना है।
