Bihar News | 3 नवंबर 2026: असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना शुरू की थी। इसके तहत पात्र कामगारों को 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद हर महीने 3,000 रुपये पेंशन देने का प्रावधान है। हालांकि, बिहार में इस योजना का लाभ लेने वाले श्रमिकों की संख्या अपेक्षा के मुकाबले काफी कम है।
राज्य में असंगठित क्षेत्र के 3.26 करोड़ से अधिक कामगार बताए जा रहे हैं, लेकिन अब तक सिर्फ 2.38 लाख श्रमिकों ने ही योजना के लिए पंजीकरण कराया है। ऐसे में करोड़ों कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
देशभर में 49 लाख से अधिक श्रमिकों का पंजीकरण
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना के तहत अब तक 49.61 लाख से अधिक असंगठित कामगार पंजीकरण करा चुके हैं। वहीं बिहार में पंजीकृत श्रमिकों की संख्या करीब 2.38 लाख है।
राज्य में असंगठित कामगारों की बड़ी आबादी के मुकाबले यह संख्या काफी कम है। इससे साफ है कि योजना को लेकर जागरूकता और पंजीकरण बढ़ाने की जरूरत बनी हुई है।
सरकार भी जमा करती है बराबर का अंशदान
प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में नियमित आय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी।
इस योजना में लाभार्थी जितना मासिक अंशदान करता है, केंद्र सरकार भी उतनी ही राशि उसके खाते में जमा करती है। निर्धारित उम्र पूरी होने पर यानी 60 वर्ष के बाद पात्र लाभार्थी को आजीवन हर महीने 3,000 रुपये पेंशन मिलती है।
18 से 40 वर्ष के कामगारों के लिए योजना
इस योजना का लाभ 18 से 40 वर्ष की उम्र के ऐसे असंगठित कामगार उठा सकते हैं, जिनकी मासिक आय 15,000 रुपये से कम है।
इसके दायरे में घरेलू कामगार, रिक्शा चालक, मोची, दर्जी, बढ़ई, कृषि मजदूर, बीड़ी बनाने वाले और निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिक शामिल हैं।
हालांकि, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) या राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के सदस्य इस योजना के पात्र नहीं हैं।
शुरुआती वर्षों के बाद कम होती गई दिलचस्पी
बिहार में योजना के प्रति शुरुआती वर्षों में अपेक्षाकृत अधिक उत्साह देखा गया था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018-19 में सबसे ज्यादा 1,08,134 श्रमिकों ने पंजीकरण कराया था। इसके बाद 2019-20 में 75,341 कामगार योजना से जुड़े।
लेकिन शुरुआती दौर के बाद पंजीकरण की रफ्तार धीमी पड़ती गई। रिपोर्ट के मुताबिक, बाद के वर्षों में सालाना पंजीकरण मुश्किल से 10 हजार के आसपास रहा। यही वजह है कि राज्य में योजना का दायरा अपेक्षित स्तर तक नहीं बढ़ पाया है।
जागरूकता और पंजीकरण बढ़ाना बड़ी चुनौती
योजना में सरकार की ओर से बराबर अंशदान और 60 वर्ष की उम्र के बाद निश्चित मासिक पेंशन का प्रावधान है। इसके बावजूद बिहार में पंजीकरण का कम आंकड़ा बताता है कि बड़ी संख्या में असंगठित कामगार अभी इससे नहीं जुड़ पाए हैं।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में मजदूरों के योजना से दूर रहने के ठोस कारणों का विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया गया है। ऐसे में कम पंजीकरण के पीछे जागरूकता की कमी, अंशदान को लेकर जानकारी या अन्य व्यावहारिक दिक्कतों को प्रमाणित कारण के रूप में बताना उचित नहीं होगा।
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