Saturday, August 1, 2026

40-50 की उम्र में महिलाओं को ओवेरियन कैंसर के संकेतों पर क्यों रहना चाहिए सतर्क? जानें कौन से लक्षण हैं चिंता की वजह.

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महिलाओं के जीवन में 40 और 50 की उम्र के बीच कई शारीरिक बदलाव आते हैं। इस दौरान पेरिमेनोपॉज यानी मेनोपॉज से पहले का समय शुरू होता है, जिसमें हार्मोन में बदलाव के कारण पीरियड्स में अनियमितता, थकान, मूड में बदलाव और पेट फूलने जैसी परेशानियां हो सकती हैं।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि हर लक्षण को केवल उम्र या मेनोपॉज से जोड़कर नजरअंदाज करना सही नहीं है। कुछ मामलों में लंबे समय तक बने रहने वाले ये संकेत ओवेरियन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं।

ओवेरियन कैंसर के लक्षणों को पहचानना क्यों मुश्किल है?

ओवेरियन कैंसर को कई बार “साइलेंट कैंसर” भी कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती चरण में इसके लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते। कई महिलाएं सामान्य हार्मोनल बदलाव और बीमारी के संकेतों के बीच अंतर नहीं कर पातीं।

विशेषज्ञों के अनुसार, पेरिमेनोपॉज के दौरान होने वाले सामान्य बदलाव आमतौर पर समय के साथ कम हो सकते हैं, जबकि कैंसर से जुड़े लक्षण लगातार बने रहते हैं और धीरे-धीरे बढ़ सकते हैं।

मेनोपॉज के सामान्य बदलाव और कैंसर के संकेतों में अंतर

पेरिमेनोपॉज के दौरान महिलाओं में ये समस्याएं आम हो सकती हैं:

  • पीरियड्स का अनियमित होना
  • अचानक गर्मी महसूस होना (हॉट फ्लैशेज)
  • रात में पसीना आना
  • नींद में परेशानी
  • मूड में बदलाव
  • हल्का पेट फूलना

वहीं, ओवेरियन कैंसर के संभावित संकेतों में शामिल हो सकते हैं:

  • लगातार पेट फूलना
  • पेट या पेल्विक हिस्से में दर्द
  • कम खाना खाने के बाद भी पेट भरा हुआ महसूस होना
  • बार-बार पेशाब आने की समस्या
  • लगातार थकान रहना
  • कब्ज या पाचन संबंधी आदतों में बदलाव

अगर ये समस्याएं बिना किसी स्पष्ट कारण के बनी रहती हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

उम्र और अन्य कारण बढ़ा सकते हैं जोखिम

ओवेरियन कैंसर का खतरा उम्र बढ़ने के साथ बढ़ सकता है और यह मेनोपॉज के बाद अधिक देखा जाता है। हालांकि, कम उम्र की महिलाओं में भी यह बीमारी हो सकती है।

इसके अलावा कुछ अन्य कारक भी जोखिम बढ़ा सकते हैं, जैसे:

  • परिवार में ओवेरियन या ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास
  • कुछ आनुवंशिक बदलाव (जेनेटिक म्यूटेशन)
  • एंडोमेट्रियोसिस
  • बांझपन से जुड़ी समस्याएं
  • धूम्रपान
  • कुछ वंशानुगत कैंसर सिंड्रोम

इनमें से कोई भी कारण यह तय नहीं करता कि महिला को कैंसर होगा, लेकिन ऐसे मामलों में स्वास्थ्य संबंधी बदलावों को गंभीरता से लेना जरूरी है।

शुरुआती जांच क्यों है जरूरी?

विशेषज्ञों के मुताबिक, सामान्य जोखिम वाली महिलाओं के लिए ओवेरियन कैंसर की शुरुआती जांच के लिए कोई आसान और प्रभावी स्क्रीनिंग तरीका उपलब्ध नहीं है। इसी वजह से कई मामलों में बीमारी का पता देर से चल पाता है।

अगर किसी महिला में लगातार नए लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर शारीरिक जांच के साथ अल्ट्रासाउंड या CA-125 जैसे कुछ टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।

किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?

इन संकेतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए:

  • रोजाना या लगातार पेट फूलना
  • पेल्विक क्षेत्र में बार-बार दर्द
  • भूख कम लगना या जल्दी पेट भर जाना
  • बिना संक्रमण के बार-बार पेशाब की समस्या
  • दो से तीन सप्ताह से अधिक समय तक बने रहने वाले नए लक्षण

ऐसे लक्षणों को केवल बढ़ती उम्र या मेनोपॉज का हिस्सा मानकर छोड़ना ठीक नहीं है।

हर दर्द का मतलब कैंसर नहीं होता

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि पेट या पेल्विक हिस्से में दर्द होने का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता। कई बार इसके पीछे सामान्य कारण जैसे यूरिन इंफेक्शन, फाइब्रॉइड या हार्मोनल बदलाव भी हो सकते हैं।

महिलाओं को घबराने के बजाय अपने शरीर में हो रहे बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। समय पर जांच कराने से गंभीर समस्या की पहचान जल्दी हो सकती है और अगर कारण सामान्य हो, तो अनावश्यक चिंता भी दूर हो जाती है।

पेरिमेनोपॉज जीवन का सामान्य चरण है, लेकिन इस दौरान शरीर में होने वाले असामान्य और लगातार बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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