रांची: विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर मंगलवार को राजधानी रांची में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और चिकित्सा विशेषज्ञों ने हेपेटाइटिस की रोकथाम, समय पर जांच और उपचार पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2030 तक हेपेटाइटिस उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य में व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग और जनजागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए लोगों को समय पर जांच कराने, जागरूक रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने सुरक्षित रक्त चढ़ाने और संक्रमण से बचाव संबंधी सावधानियों के महत्व पर भी बल दिया।
राज्य के हेपेटाइटिस कार्यक्रम से जुड़े नोडल अधिकारी डॉ. कमलेश कुमार ने बताया कि यह बीमारी मुख्य रूप से लीवर को प्रभावित करती है और इसके पांच प्रमुख प्रकार हैं। इनमें हेपेटाइटिस बी और सी को अधिक गंभीर माना जाता है। उन्होंने जानकारी दी कि वायरल लोड जांच की सुविधा को मजबूत करने के लिए राज्य के सभी पांच प्रमंडलों में ट्रूनेट मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने विभिन्न प्रकार के हेपेटाइटिस के संक्रमण के तरीकों पर भी प्रकाश डाला। राज्य महामारी विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण कर्ण ने बताया कि हेपेटाइटिस ए और ई प्रायः दूषित भोजन और पानी के सेवन से फैलते हैं, जबकि हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमित रक्त, दूषित सुई तथा असुरक्षित यौन संबंध के माध्यम से फैल सकते हैं।
सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने गर्भवती महिलाओं, एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों और लंबे समय से हीमोडायलिसिस करा रहे मरीजों को नियमित जांच कराने की सलाह दी। उनके अनुसार इन समूहों में संक्रमण का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है, इसलिए समय पर जांच बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम के दौरान हेपेटाइटिस से स्वस्थ हो चुके कुछ लोगों के अनुभव भी साझा किए गए और इस क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले चिकित्सकों को सम्मानित किया गया। रिम्स के प्रोफेसर डॉ. अजित डुंगडुंग ने कहा कि आधुनिक उपचार पद्धतियों के कारण हेपेटाइटिस सी के अधिकांश मरीजों का सफल इलाज संभव है।
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि वे बीमारी के प्रति जागरूक रहें, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं और संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियों का पालन करें। उनका मानना है कि जागरूकता, समय पर पहचान और प्रभावी उपचार के माध्यम से 2030 तक हेपेटाइटिस उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की जा सकती है।
