Tuesday, November 3, 2026

13 लाख Android डिवाइस में जानबूझकर डाला गया मैलवेयर! Google ने पार्टनर कंपनी पर की बड़ी कार्रवाई

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Tech News | 3 नवंबर 2026: Android डिवाइस इस्तेमाल करने वालों के लिए साइबर सुरक्षा से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। Google के एक पार्टनर पर आरोप है कि उसने करीब 13 लाख Android डिवाइस में जानबूझकर बैकडोर और मैलवेयर शामिल किया। इसके जरिए यूजर्स की जानकारी के बिना उनके डिवाइस का इस्तेमाल विज्ञापन धोखाधड़ी, डेटा चोरी और संदिग्ध इंटरनेट गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में चीन की कंपनी Videostrong Technology का नाम सामने आया है। कंपनी पर अपने बनाए डिवाइस में छिपा हुआ बैकडोर डालने का आरोप है। मामले के सामने आने के बाद Google ने कार्रवाई करते हुए कंपनी के साथ अपना संबंध खत्म कर दिया है। अब Videostrong को प्रमाणित Android डिवाइस बनाने या सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराने की अनुमति नहीं है।

पहली बार डिवाइस चालू करते ही सक्रिय हो जाता था मैलवेयर

रिपोर्ट के अनुसार, Videostrong ने मैलवेयर को छिपाने के लिए तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल किया था। इसके कारण डिवाइस पहली बार चालू होने पर ही मैलवेयर सक्रिय हो सकता था।

यह समस्या किसी एक मॉडल तक सीमित नहीं थी। अलग-अलग ब्रांड और मॉडल के कई Android TV सेट-टॉप बॉक्स में यह खतरा मौजूद था। इसके अलावा टेलीहेल्थ डिवाइस, कराओके मशीन और डिजिटल साइनेज जैसे उपकरण भी प्रभावित हुए।

यूजर्स की जानकारी के बिना हो रही थीं संदिग्ध गतिविधियां

इस मैलवेयर का सबसे बड़ा खतरा यह था कि डिवाइस मालिक को इसकी जानकारी तक नहीं होती थी, जबकि उसके डिवाइस का इस्तेमाल दूसरे लोग कर रहे थे।

संक्रमित डिवाइस के जरिए कथित तौर पर कई तरह की अवैध और संदिग्ध गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। इनमें शामिल हैं:

  • विज्ञापन धोखाधड़ी: यूजर्स के डिवाइस का इस्तेमाल फर्जी विज्ञापन गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
  • डेटा चोरी: डिवाइस से जुड़ी जानकारी तक अनधिकृत पहुंच बनाई जा सकती थी।
  • अनधिकृत नेटवर्क ट्रैफिक: यूजर की जानकारी और अनुमति के बिना इंटरनेट ट्रैफिक को दूसरे नेटवर्क के जरिए भेजा जा रहा था।
  • बॉटनेट गतिविधियां: संक्रमित डिवाइस को दूर से नियंत्रित किए जाने वाले नेटवर्क का हिस्सा बनाया गया था।

बैकडोर का एक्सेस बेचकर कमाई करने का आरोप

रिपोर्ट में बताया गया है कि Videostrong ने कथित तौर पर डिवाइस में मौजूद बैकडोर का एक्सेस दूसरे साइबर अपराधियों से जुड़े सहयोगियों को बेचा। इन लोगों ने डिवाइस में अपने मैलवेयर मॉड्यूल का इस्तेमाल किया।

इसके जरिए संक्रमित डिवाइस से विज्ञापन धोखाधड़ी कराई जाती थी और उन्हें गुप्त रूप से रेजिडेंशियल प्रॉक्सी नेटवर्क से जोड़ा जाता था। यानी आम लोगों के इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल उनकी जानकारी के बिना दूसरे उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था।

Google ने कमांड एंड कंट्रोल डोमेन पर भी की कार्रवाई

मामले का पता चलने के बाद Google ने केवल Videostrong के साथ संबंध खत्म करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने इस गतिविधि से जुड़े सहयोगी समूहों के कमांड एंड कंट्रोल डोमेन को भी निष्क्रिय किया।

हालांकि, इन समूहों के पास दूसरे डिवाइस और वितरण माध्यम भी मौजूद थे। इसी वजह से Google की कार्रवाई के बाद कम से कम एक करोड़ अतिरिक्त डिवाइस का इन नेटवर्क से संपर्क टूटने की जानकारी सामने आई है।

इस घटना के बाद Google ने डिवाइस निर्माताओं की जांच और समीक्षा प्रक्रिया में भी बदलाव किए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं का खतरा कम किया जा सके।

Android TV और सेट-टॉप बॉक्स यूजर्स क्या सावधानी रखें?

यह घटना बताती है कि किसी डिवाइस पर Android का नाम या किसी बड़ी कंपनी से जुड़ी प्रमाणन प्रक्रिया होना ही उसकी सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं है। यूजर्स को भी अपने डिवाइस की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना चाहिए।

कुछ जरूरी सावधानियां:

  1. डिवाइस का सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपडेट नियमित रूप से जांचें।
  2. अनजान वेबसाइट या संदिग्ध स्रोत से ऐप इंस्टॉल करने से बचें।
  3. डिवाइस खरीदते समय निर्माता और उसके आधिकारिक सपोर्ट की जानकारी जांचें।
  4. डिवाइस असामान्य तरीके से काम करे तो निर्माता की आधिकारिक सहायता लें।
  5. पुराने या लंबे समय से अपडेट नहीं मिलने वाले डिवाइस के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतें।

साइबर सुरक्षा के लिए बड़ा सबक

13 लाख Android डिवाइस से जुड़ा यह मामला दिखाता है कि सप्लाई चेन में शामिल किसी एक कंपनी की लापरवाही या कथित गलत गतिविधि लाखों यूजर्स को प्रभावित कर सकती है। इसलिए केवल स्मार्टफोन ही नहीं, बल्कि स्मार्ट टीवी, सेट-टॉप बॉक्स और इंटरनेट से जुड़े अन्य उपकरणों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।

Google की कार्रवाई से जुड़े नेटवर्क पर रोक लगाने में मदद मिली है, लेकिन यूजर्स के लिए सतर्क रहना और भरोसेमंद स्रोतों से ही डिवाइस तथा सॉफ्टवेयर लेना बेहद महत्वपूर्ण है।

Bharat Superfast News | Technology Desk


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