Bihar Political News | 3 नवंबर 2026: बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से लोगों से मुफ्त बिजली का लाभ स्वेच्छा से छोड़ने की अपील किए जाने के बाद अब केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी इस पहल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि बिहार को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए सरकार के राजस्व स्रोतों को मजबूत करना जरूरी है।
चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री की अपील को सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि यह विषय केवल पैसों की बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के भविष्य और विकास से भी जुड़ा हुआ है।
चिराग पासवान बोले- बिहार के भविष्य से जुड़ा है मामला
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जनता के सामने अपना विचार रखा है। इसे सरकार की ओर से की गई अपील के रूप में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी इच्छा से 125 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ छोड़ने के लिए आगे आ रहे हैं, वे प्रशंसा के पात्र हैं। चिराग के मुताबिक, बिहार को विकास की राह पर तेजी से आगे ले जाने के लिए मजबूत आर्थिक आधार और पर्याप्त संसाधनों की जरूरत है।
मुख्यमंत्री की पहल को बताया सकारात्मक कदम
चिराग पासवान ने सम्राट चौधरी की पहल की सराहना करते हुए कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा हो सकेगा, जब बिहार जैसे राज्यों में भी विकास की गति तेज होगी।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार के पास पर्याप्त संसाधन होने चाहिए। इसके लिए राजस्व के स्रोतों को मजबूत करना भी जरूरी है।
विजय चौधरी और मिथिलेश तिवारी ने भी किया समर्थन
125 यूनिट मुफ्त बिजली छोड़ने की अपील को लेकर राज्य सरकार के अन्य नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने मुख्यमंत्री की अपील का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार गरीबों के हित में काम करती रहेगी।
वहीं, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी लोगों से स्वेच्छा से मुफ्त बिजली का लाभ छोड़ने की अपील की। उनका कहना है कि इससे बचने वाली राशि का इस्तेमाल गरीबों के कल्याण से जुड़े कार्यों में किया जा सकेगा।
मुफ्त बिजली योजना को लेकर क्यों हो रही चर्चा?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अपील के बाद बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना और राज्य के विकास के लिए संसाधन जुटाने का मुद्दा चर्चा में है। चिराग पासवान के समर्थन से इस विषय पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
हालांकि, मुफ्त बिजली का लाभ छोड़ना अनिवार्य किए जाने की बात खबर में नहीं कही गई है। नेताओं के बयान इसे स्वैच्छिक अपील के रूप में पेश करते हैं।
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