Tuesday, September 15, 2026

हजारीबाग में पर्यावरण संरक्षण पर मंथन, झील-तालाबों को प्रदूषण से बचाने और पौधों की GPS निगरानी की मांग.

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हजारीबाग: जिला पर्यावरण समिति की बैठक में पर्यावरण संरक्षण और जलस्रोतों को बचाने से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में समिति के सदस्य के रूप में शामिल होकर वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) को ज्ञापन सौंपा गया। इसमें जिले में बड़े पैमाने पर पौधरोपण, झील और तालाबों की सफाई तथा जलस्रोतों को प्रदूषण से सुरक्षित रखने की मांग की गई।

पौधों की निगरानी के लिए GPS सिस्टम की मांग

ज्ञापन में पौधरोपण अभियान के बाद लगाए गए पौधों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। इसके लिए GPS आधारित मॉनिटरिंग व्यवस्था विकसित करने की मांग की गई, ताकि पौधों की स्थिति और उनकी देखभाल की जानकारी नियमित रूप से मिल सके।

झील और तालाबों के सौंदर्यीकरण के दौरान मौजूदा पेड़-पौधों को नुकसान नहीं पहुंचाने की बात भी कही गई। यदि किसी कारण से पेड़ कटता या खराब होता है तो उसके स्थान पर नए पौधे लगाने की मांग रखी गई।

कोयला क्षेत्रों में पानी का छिड़काव और पौधरोपण बढ़ाने पर जोर

बढ़ते तापमान और पर्यावरणीय दबाव को देखते हुए कोयला क्षेत्रों में नियमित रूप से पानी का छिड़काव करने का सुझाव दिया गया। साथ ही ऐसे इलाकों में अधिक संख्या में पौधे लगाने की जरूरत बताई गई।

समिति की ओर से जलस्रोतों को धार्मिक गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण से बचाने का मुद्दा भी उठाया गया। झील में प्रतिमा और पूजा सामग्री के विसर्जन पर रोक लगाने तथा इसके लिए अलग स्थान निर्धारित करने की मांग की गई।

नालों का गंदा पानी झील-तालाब में जाने से रोकने की मांग

ज्ञापन में झील और तालाबों में नालों का पानी पहुंचने से रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाने की मांग की गई। झील में प्रवेश करने वाले पानी की नियमित जांच कराने और प्रदूषित पानी को जलस्रोतों में जाने से रोकने पर विशेष जोर दिया गया।

इसके अलावा जलप्रवाह को प्रभावित करने वाले पाइप और कलवर्ट की मरम्मत, सफाई तथा नियमित रखरखाव की जरूरत बताई गई।

कीटनाशक, बायो-वेस्ट और औद्योगिक प्रदूषण पर भी चिंता

बैठक में किसानों द्वारा कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल पर निगरानी बढ़ाने की मांग की गई। अस्पतालों से निकलने वाले बायो-वेस्ट के सुरक्षित निपटारे को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी बताया गया।

औद्योगिक और कोयला क्षेत्रों में Pollution Display Unit लगाने की मांग की गई, ताकि प्रदूषण से जुड़े आंकड़ों और स्थिति की निगरानी की जा सके।

रामनगर की नदी को नाले में बदलने से रोकने की मांग

ज्ञापन में रामनगर से होकर गुजरने वाली नदी के स्वरूप में हो रहे बदलाव का मुद्दा भी उठाया गया। नदी को नाले में तब्दील होने से बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई।

बैठक में उठाए गए इन मुद्दों का मुख्य उद्देश्य जिले के जलस्रोतों, हरित क्षेत्र और पर्यावरण को संरक्षित करना तथा प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करना रहा।

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