Tuesday, May 12, 2026

हजारीबाग नगर निगम में सफाई उपकरणों की खरीदारी में घोटाले का आरोप लगया जा रहा है.

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हजारीबाग: हजारीबाग नगर निगम में करोड़ों रुपये के सफाई उपकरण खरीदने के बावजूद शहर की सड़कों पर कूड़े के अंबार लगे हुए हैं. महापौर अरविंद राणा ने इसे बड़े पैमाने पर घोटाला बताते हुए पिछले 10 साल की खरीदारियों की सीबीआई जांच की मांग की है, जबकि नगर आयुक्त ओम प्रकाश गुप्ता दावा कर रहे हैं कि उपकरणों का उपयोग हो रहा है और बाकी की प्रक्रिया तेज कर दी गई है.

महापौर का गंभीर आरोप

नगर निगम के महापौर अरविंद राणा ने नगर निगम प्रशासन पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में जितनी भी सफाई संबंधी सामग्री खरीदी गई, वह महंगे दामों पर ली गई लेकिन उसका कोई सदुपयोग नहीं हो रहा है. महापौर ने डंप यार्ड का जिक्र करते हुए कहा, “वहां जाकर आंखों से आंसू आ जाते हैं. ऑटोमैटिक झाड़ू लगाने वाली मशीनें, शौचालय साफ करने वाली अत्याधुनिक मशीनें, फॉगिंग मशीनें और टिप्पर खड़े-खड़े खराब हो रहे हैं.”

उन्होंने आरोप लगाया कि 36 नए टिप्पर आए हैं, जबकि पुराने 50-60 टिप्पर पहले से पड़े हैं. किसी की भी सही सर्विसिंग नहीं हुई, सिर्फ कागजों पर एंट्री की जा रही है. महापौर ने स्पष्ट किया कि वे इस मामले में सीबीआई या सीआईडी जांच के लिए राज्य सरकार को पत्र लिखने जा रहे हैं.

Hazaribag Municipal Corporation

आयुक्त का बचाव

नगर आयुक्त ओम प्रकाश गुप्ता ने महापौर के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि जितने भी उपकरण खरीदे गए हैं, उनका उपयोग हो रहा है. उन्होंने बताया कि सहायक नगर आयुक्त की अध्यक्षता में टीम गठित की गई है जो उपकरणों का निरीक्षण कर रही है. आयुक्त ने जानकारी दी कि जनवरी और अप्रैल में चार-चार नई गाड़ियां आई हैं और कुल 18 गाड़ियां आने वाली हैं. टंकी साफ करने वाली नई गाड़ियों का ट्रायल भी चल रहा है, जिससे पहले की तरह बाहर से गाड़ियां मंगवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. उन्होंने ड्राइवरों की कमी स्वीकार करते हुए कहा कि उनकी भर्ती की प्रक्रिया तेज कर दी गई है.

Hazaribag Municipal Corporation

शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था

शहर के चौक-चौराहों पर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं. कई इलाकों में कूड़ेदान तक नहीं हैं, जिसके कारण लोग खुले में कूड़ा फेंक रहे हैं. नगर निगम द्वारा खरीदी गई ऑटोमैटिक झाड़ू मशीन, टिप्पर, बास्केट और अन्य उपकरणों का सदुपयोग नहीं हो पा रहा है. कुछ मशीनें तो डंप यार्ड में धूल खाती पड़ी हैं.

आरटीआई कार्यकर्ता की प्रतिक्रिया

आरटीआई कार्यकर्ता मनोज गुप्ता (जिन्हें मैंगो मैन के नाम से जाना जाता है) ने शहर की स्थिति पर दुख जताया. उन्होंने कहा कि नगर निगम के पास पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन कमीशन के चक्कर में सामान खरीदकर रख दिया जाता है. “अगर इन उपकरणों का सही उपयोग होता तो हजारीबाग साफ-सुथरा शहर बन सकता था. उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए कि सामान किसके निर्देश पर खरीदा गया और कितना घोटाला हुआ,” गुप्ता ने कहा.

यह मामला अब हजारीबाग की सफाई व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़ा कर रहा है. आम नागरिकों को उम्मीद है कि महापौर और आयुक्त के बीच इस विवाद से शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार आएगा.

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