हजारीबाग: नगर निगम इन दिनों सुर्खियों में है. बुधवार को नगर निगम बोर्ड की बैठक आयोजित थी. बैठक को लेकर तैयारी भी चल रही थी. बैठक के वक्त पदाधिकारी के उपस्थित नहीं होने के कारण महापौर और पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया. घंटों जनप्रतिनिधि पदाधिकारी के आने का इंतजार करते रहे, लेकिन पदाधिकारी नहीं पहुंचे. इस कारण बैठक नहीं हो पाई. बोर्ड की बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी थी.
महापौर अरविंद राणा ने बताया कि बैठक में कई योजना, जिसमें बरसात से पहले नाली निर्माण और साफ-सफाई को लेकर कदम उठाना था. वह सारा अब ठंडे बस्ते में चला गया है. महापौर ने जानकारी दी कि बोर्ड बैठक में निगम के अधिकारियों की उपस्थिति बेहद महत्वपूर्ण होती है. नगर आयुक्त बैठक में नहीं आए, सहायक नगर आयुक्त बैठक में पहुंचे और कुछ ही मिनट में हाईकोर्ट जाने की बात कह कर निकल गए. इसके बाद कोई भी पदाधिकारी बैठक में नहीं रहा. अंतिम दौर में एक पदाधिकारी पहुंचे, लेकिन तब तक जनप्रतिनिधियों ने बोर्ड की बैठक का बहिष्कार कर दिया था
बैठक में न आना गैर जिम्मेदाराना व्यवहार है: महापौर
महापौर ने कहा कि यह बेहद गैर जिम्मेदाराना व्यवहार है. जिसे असंवैधानिक घोषित किया जा सकता है. जनप्रतिनिधि पदाधिकारी के आने का इंतजार करते रह गए और फिर वापस लौट गए. यहां तक कि बोर्ड बैठक में पूरी प्रकिया की रिकॉर्डिंग होती है. रिकॉर्डिंग करने वाले कर्मी भी नहीं पहुंचे. ऐसे में यह प्रतीत होता है कि पहले से बैठक नहीं होने देने को लेकर रणनीति बनाई गई थी. महापौर ने कहा कि आम जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारी है. बहुत ही विश्वास के साथ लोग मतदान करते हैं. जब आम लोगों के विश्वास पर खड़ा नहीं उतरेंगे तो यह अपमानजनक है.
अधिकारी का न पहुंचना अपमानजनक है: पार्षद
बैठक में पहुंची महिला पार्षद निखत यासमीन ने बताया कि यह बेहद अपमानजनक स्थिति हो गई है कि जनप्रतिनिधि घंटों पदाधिकारी के आने का इंतजार करते रहे. कोई भी पदाधिकारी नहीं पहुंचा. जिस कारण यह बैठक स्थगित हो गई. उन्होंने कहा कि नगर निगम में 36 वार्ड है, जहां कई तरह की योजना धरातल पर उतरनी थी. बरसात से पहले साफ-सफाई को लेकर रणनीति बनानी थी. जो धरा का धरा रह गया. प्रशासनिक उदासीनता के कारण बैठक स्थागित हो गई.


