हजारीबाग, 26 अक्टूबर 2026। हजारीबाग जिला परिषद में प्रभारी जिला अभियंता की जिम्मेदारी को लेकर एक बार फिर बदलाव हुआ है। झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद उपायुक्त कार्यालय की विकास शाखा ने 23 अक्टूबर 2026 को नया आदेश जारी कर सहायक अभियंता आशीष कुमार आनंद को दोबारा प्रभारी जिला अभियंता की जिम्मेदारी सौंप दी। उन्हें न्यायालय के अगले आदेश या विभागीय आदेश तक इस पद का प्रभार दिया गया है।
इससे पहले पंचायती राज विभाग के 31 जुलाई 2026 के आदेश के आधार पर ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को जिला परिषद के जिला अभियंता का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासनिक व्यवस्था में फिर बदलाव किया गया है। इस घटनाक्रम के बीच जिला परिषद की टेंडर प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोप भी चर्चा में हैं।
31 जुलाई के विभागीय आदेश से बदली थी व्यवस्था
पंचायती राज विभाग ने 31 जुलाई 2026 को जिला परिषदों में प्रभारी जिला अभियंता की नियुक्ति से संबंधित आदेश जारी किया था। यह आदेश वित्त विभाग के 19 मई 2026 के परिपत्र के आधार पर दिया गया था।
विभागीय निर्देश के अनुसार, किसी पदाधिकारी को उससे उच्च वेतनमान वाले पद का प्रभार नहीं दिया जाना चाहिए। इसी आधार पर उन जिलों में व्यवस्था बदलने का निर्देश दिया गया था, जहां सहायक अभियंता या सेवा प्राप्त सहायक अभियंता प्रभारी जिला अभियंता के रूप में कार्यरत थे।
हजारीबाग में इस निर्देश के बाद ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को जिला परिषद के जिला अभियंता का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। इससे पहले यह जिम्मेदारी सहायक अभियंता आशीष कुमार आनंद संभाल रहे थे।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिर मिली जिम्मेदारी
उपलब्ध विवरण के अनुसार, आशीष कुमार आनंद ने विभागीय आदेश के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। यह मामला W.P.(S) No. 6846/2026 के तहत आशीष कुमार आनंद बनाम झारखंड राज्य एवं अन्य के रूप में दर्ज बताया गया है।
बताया गया है कि हाईकोर्ट ने 9 सितंबर 2026 को पारित आदेश में पंचायती राज विभाग की 31 जुलाई 2026 की अधिसूचना को निरस्त कर दिया। इसके बाद उपायुक्त कार्यालय की विकास शाखा ने 23 अक्टूबर को नया आदेश जारी किया।
नए आदेश के अनुसार, आशीष कुमार आनंद को न्यायालय के अगले आदेश या विभागीय निर्देश तक प्रभारी जिला अभियंता, जिला परिषद, हजारीबाग के रूप में जिम्मेदारी दी गई। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किए जाने की बात कही गई है।
23 अक्टूबर को जारी हुआ नया प्रशासनिक आदेश
शिकायत पत्र में दावा किया गया है कि 23 अक्टूबर को रात करीब आठ बजे उपायुक्त कार्यालय से आदेश जारी कर कार्यपालक अभियंता को जिला परिषद के जिला अभियंता के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया। इसके बाद आशीष कुमार आनंद को जिम्मेदारी सौंप दी गई।
शिकायतकर्ता ने कार्यालय में रात के समय कुर्सी और नेम प्लेट बदले जाने का भी दावा किया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती। इस संबंध में प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
टेंडर प्रक्रिया को लेकर लगाए गए अनियमितता के आरोप
जिला परिषद में प्रभार परिवर्तन के बीच टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कार्यपालक अभियंता ने जिम्मेदारी संभालने के बाद कुछ निविदाओं की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए थे।
शिकायत पत्र के अनुसार, कुछ मामलों में तकनीकी और वित्तीय बिड निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप समयांतराल के बिना खोले जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने निविदा प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और समय-सीमा के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया है।
इन आरोपों की पुष्टि संबंधित टेंडर रिकॉर्ड, विभागीय जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही की जा सकती है। फिलहाल उपलब्ध विवरण से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी नियम का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
प्रमाणपत्रों के सत्यापन को लेकर भी शिकायत
शिकायत पत्र में कुछ निविदादाताओं के प्रमाणपत्रों के सत्यापन में कथित गड़बड़ियों और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि निविदा प्रक्रिया में नियमों का पालन कराने की कोशिश के बाद संबंधित अधिकारियों के बीच विवाद की स्थिति बनी।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी प्रमाणपत्र को फर्जी या किसी अधिकारी को अनियमितता के लिए जिम्मेदार ठहराने से पहले दस्तावेजों का सत्यापन और सक्षम प्राधिकारी की जांच जरूरी है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी सामने आना बाकी है।
जांच और पारदर्शिता पर टिकी नजरें
शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जांच कराने और टेंडर से संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा करने की मांग की है। मामले में प्रशासनिक प्रभार परिवर्तन के साथ-साथ निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट के आदेश के बाद आशीष कुमार आनंद को प्रभारी जिला अभियंता की जिम्मेदारी दोबारा सौंपी गई है। वहीं, टेंडर प्रक्रिया से जुड़े आरोपों पर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए आधिकारिक दस्तावेजों, संबंधित पक्षों के बयान और जांच के नतीजों का इंतजार करना होगा।
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