देशभर में खांसी की सिरप की अनियंत्रित बिक्री और इसके गलत इस्तेमाल पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद सख्त कदम उठाया है. केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए ‘औषधि नियमावली, 1945’ में बड़ा संशोधन किया है. इस नए बदलाव के तहत अब देश के छोटे से छोटे गांवों में भी बिना लाइसेंस के खांसी की सिरप बेचने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य दवाओं के वितरण में पारदर्शिता लाना और आम जनता, विशेषकर बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
क्या हुआ है बदलाव?
मंत्रालय द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, इस नए नियम को ‘औषधि नियम, 2026’ के रूप में अधिसूचित किया गया है. इस संशोधन के जरिए औषधि नियमावली के ‘शेड्यूल के’ के क्रम संख्या 13, प्रविष्टि 7 में से “सिरप” शब्द को हमेशा के लिए हटा दिया गया है.
दरअसल, अब तक ‘शेड्यूल के’ के तहत देश के उन सुदूर और ग्रामीण इलाकों में कुछ विशेष छूट दी गई थी, जिनकी आबादी 1,000 से कम थी. इस छूट का मकसद उन दूर-दराज के इलाकों तक बुनियादी दवाएं पहुंचाना था जहां कोई लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर या फार्मेसी उपलब्ध नहीं थी. इस रियायत के कारण छोटे गांवों में आम किराना दुकानों या बिना लाइसेंस वाले काउंटरों पर भी खांसी की सिरप “घरेलू उपचार” के रूप में आसानी से मिल जाती थी. लेकिन अब यह छूट पूरी तरह खत्म हो गई है.
अब सिर्फ लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी पर मिलेगी दवा
नियमों में हुए इस बदलाव के बाद, अब देश के किसी भी कोने में खांसी की सिरप की बिक्री केवल और केवल ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत पंजीकृत और लाइसेंस प्राप्त फार्मेसियों के माध्यम से ही की जा सकेगी. स्वास्थ्य मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि यह फैसला ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) के साथ गहन विचार-विमर्श और आम जनता से मिले सुझावों व आपत्तियों की समीक्षा करने के बाद ही फाइनल किया गया है. सरकार का यह नया नियम 9 जून 2026 से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू हो चुका है.
क्यों पड़ी इस कड़े कानून की जरूरत?
पिछले कुछ समय में खांसी की सिरप में जहरीले सॉल्वैंट्स (जैसे डायथिलीन ग्लाइकोल) की मिलावट और इसके अत्यधिक दुरुपयोग की कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टर की पर्ची के बिना सिरप की धड़ल्ले से हो रही बिक्री के कारण न सिर्फ बच्चों के स्वास्थ्य पर जानलेवा असर पड़ रहा था, बल्कि कई नशीली और कफ सिरप का इस्तेमाल लोग नशे के तौर पर भी करने लगे थे.
अधिकारियों के मुताबिक, इस संशोधन से पूरी फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन में जवाबदेही तय होगी. अब कंपनियों से लेकर खुदरा विक्रेताओं तक, हर किसी को कड़े नियमों का पालन करना होगा. सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी बिना लाइसेंस के सिरप बेचता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.


