Monday, May 11, 2026

सोमवार को लगातार तीसरे दिन शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई.

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सोमवार को लगातार तीसरे दिन शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई. पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता न हो पाने के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच बेंचमार्क सेंसेक्स 1,313 अंक गिर गया.

30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,312.91 अंक या 1.70 प्रतिशत गिकर 76,015.28 पर बंद हुआ. दिन भर में यह 1,370.79 अंक या 1.77 प्रतिशत गिरकर 75,957.40 पर आ गया.

50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 360.30 अंक या 1.49 प्रतिशत गिरकर 23,815.85 पर बंद हुआ. गुरुवार से शुरू हुए तीन सत्रों में निफ्टी 2 प्रतिशत से अधिक या 515 अंक गिरा है, जबकि सेंसेक्स लगभग 1,950 अंक या 2.5 प्रतिशत गिरा है.

एक विशेषज्ञ के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के नवीनतम शांति प्रस्ताव पर दी गई प्रतिक्रिया को ‘पूरी तरह अस्वीकार्य’ बताते हुए खारिज करने से तत्काल राजनयिक सफलता की उम्मीदें धूमिल हो गईं.

विश्लेषकों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मितव्ययिता उपायों की अपील ने विदेशी मुद्रा भंडार, ईंधन की कीमतों और उपभोग के दृष्टिकोण को लेकर निवेशकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया. सेंसेक्स की 30 कंपनियों में टाइटन सबसे बड़ा नुकसान झेलने वाला शेयर रहा, जिसमें लगभग 7 प्रतिशत की गिरावट आई.

इंटरग्लोब एविएशन, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, भारती एयरटेल, इटरनल और रिलायंस इंडस्ट्रीज प्रमुख रूप से पिछड़ने वाले शेयरों में शामिल थे. सन फार्मा, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अदानी पोर्ट्स, कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक लाभ कमाने वाले शेयरों में शामिल रहे. वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 2.23 प्रतिशत बढ़कर 103.5 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. सेंसेक्स 1,313 अंक गिरा, निफ्टी 23,850 के नीचे बंद हुआ; सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और रियल एस्टेट शेयरों का सबसे ज्यादा प्रभाव रहा.

आज भारतीय शेयर बाजारों में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिसमें बढ़ते भू-राजनीतिक सरोकारों और मुद्रास्फीति के बढ़ते दबाव के डर के बीच बेंचमार्क सूचकांकों में 1.4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई.

लिवेलॉन्ग वेल्थ के रिसर्च एनालिस्ट और संस्थापक हरिप्रसाद के ने कहा, “कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के डर ने बाजार में शेयरों की आक्रामक बिक्री को बढ़ावा दिया, जिससे सूचकांकों में गिरावट आई और बाजार बंद हुआ.”

एशियाई बाजारों में, जापान का निक्की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग बढ़त के साथ बंद हुए. यूरोप के प्रमुख बाजारों में दोपहर के कारोबार में ज्यादातर में गिरावट का रुख था। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे.

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘ईरान के शांति प्रस्ताव को ट्रंप द्वारा अस्वीकार किए जाने के बाद खाड़ी देशों में फिर से तनाव बढ़ने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई और मानक सूचकांक सूचकांक निफ्टी 24,000 अंक से नीचे फिसल गया.’’

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री के ऊर्जा संरक्षण और गैर-जरूरी विदेश यात्रा से बचने की अपील के बाद निवेशकों के बीच सतर्क रुख और बढ़ गया है. इससे निवेशकों के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, रुपये में गिरावट और चालू खाते के घाटे पर दबाव के आर्थिक प्रभाव को लेकर आशंका बढ़ी है.”

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 4,110.60 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. उन्होंने कहा कि आज की इस कमजोरी का तात्कालिक कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 10 मई का भाषण था, जिसे बाजार ने बढ़ते मैक्रोइकोनॉमिक तनाव के संकेत के रूप में समझा. हरिप्रसाद ने आगे कहा, “अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने पहले ही बाजार के सेंटिमेंट को कमजोर कर दिया था, वहीं प्रधानमंत्री की मितव्ययिता उपायों की अपील ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार, ईंधन की लागत और उपभोग के दृष्टिकोण को लेकर निवेशकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया.”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को इस बात पर जोर दिया कि केंद्र सरकार पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के प्रतिकूल प्रभावों से लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, सोने की खरीद और विदेश यात्रा को स्थगित करने जैसे उपायों का आह्वान किया. हैदराबाद में तेलंगाना भाजपा द्वारा आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए, उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच विदेशी मुद्रा संरक्षण के लिए पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने, शहरों में मेट्रो रेल सेवाओं का उपयोग करने, कारपूलिंग करने, इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का अधिक उपयोग करने, पार्सल परिवहन के लिए रेलवे सेवाओं का उपयोग करने और घर से काम करने का सुझाव दिया.

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