मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी का रुख रहा. मेटल, पीएसयू बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों में जोरदार लिवाली के चलते घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स मजबूती के साथ बंद हुए. उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty 50) एक बार फिर 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने में सफल रहा.
सत्र के अंत में, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स 347.14 अंक यानी 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,155.62 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 50 इंडेक्स 96.55 अंक यानी 0.4 प्रतिशत की मजबूती दर्ज करते हुए 24,085.70 पर बंद हुआ. आज बाजार की शुरुआत सतर्क रही, लेकिन आखिरी घंटों में चुनिंदा हैवीवेट शेयरों में आई खरीदारी ने बाजार को ऊपर खींच लिया.
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए तकनीकी तौर पर अब 24,100 से 24,200 का क्षेत्र तत्काल प्रतिरोध के रूप में सामने आ रहा है. यदि बाजार इस स्तर को पार करता है, तो आगे और तेजी देखी जा सकती है. दूसरी ओर, गिरावट की स्थिति में 24,000 का स्तर एक बेहद महत्वपूर्ण और मजबूत सपोर्ट के रूप में काम करेगा, जो पहले बाजार के लिए एक बड़ी बाधा बना हुआ था.
छोटे और मझोले शेयरों में भी रही रौनक
बेंचमार्क इंडेक्स के साथ-साथ आज ब्रॉडर मार्केट यानी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी अच्छी रौनक देखी गई. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.52 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.79 प्रतिशत की छलांग लगाकर बंद हुआ. छोटे और मझोले शेयरों में आए इस उछाल से खुदरा निवेशकों की धारणा को काफी बल मिला है.
किस सेक्टर का कैसा रहा हाल?
सेक्टर के लिहाज से बात करें तो आज ‘निफ्टी पीएसयू बैंक’ इंडेक्स ने बाजार में सबसे शानदार प्रदर्शन किया और निवेशकों को आकर्षित किया. इसके बाद निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी मेटल इंडेक्स भी हरे निशान में बंद हुए. दूसरी तरफ, मुनाफे की वसूली के कारण निफ्टी ऑटो और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स आज के सत्र में सबसे बड़े पिछड़े साबित हुए और गिरावट के साथ बंद हुए.
निफ्टी के प्रमुख शेयरों में ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और हिंडालको इंडस्ट्रीज आज के टॉप गेनर्स (सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाले) रहे. इनकी अगुवाई में बाजार को दिनभर सहारा मिला.
अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर टिकी नजरें
इस बीच, अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) की नीतिगत बैठक के फैसले से पहले निवेशकों ने काफी सतर्क रुख अपनाया. फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) द्वारा ब्याज दरों को 3.5 से 3.75 प्रतिशत पर यथावत रखने की उम्मीद है. निवेशक वैश्विक विकास दर और महंगाई पर केंद्रीय बैंक की टिप्पणी का इंतजार कर रहे हैं. दूसरी ओर, डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल की कीमतों के सीमित दायरे में रहने के कारण भारतीय रुपया भी 94.50 के करीब सपाट बंद हुआ. विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पावधि में रुपया 94.00 से 94.85 के दायरे में कारोबार कर सकता है.


