मुंबई : सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 424.44 अंक की बढ़त के साथ 75,033.42 अंक पर जबकि निफ्टी 141.90 अंक चढ़कर 23,554.50 अंक पर पहुंच गया. गुरुवार को शुरुआती कारोबार में बेंचमार्क शेयर सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी देखी गई. बैंकिंग शेयरों में खरीदारी और अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन को लेकर एशियाई बाजारों से मिल रहे सकारात्मक संकेतों के चलते बाजार में तेजी आई.
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 450.51 अंक या 0.60 प्रतिशत बढ़कर 75,059.49 पर पहुंच गया. वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 169.95 अंक या 0.73 प्रतिशत बढ़कर 23,582.55 पर पहुंच गया.
सेंसेक्स के अंतर्गत आने वाले शेयरों में अदानी पोर्ट्स, ट्रेंट, एशियन पेंट्स, एनटीपीसी, सन फार्मास्यूटिकल्स, अल्ट्राटेक सीमेंट, भारती एयरटेल, लार्सन एंड टुब्रो, आईटीसी, टाटा स्टील, आईसीआईसीआई बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा प्रमुख लाभ कमाने वाले शेयर रहे।दूसरी ओर, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और टेक महिंद्रा के शेयर गिरावट में कारोबार कर रहे थे.
बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 4,703.15 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 5,869.05 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. यह जानकारी बाजार विनिमय आंकड़ों से मिली है. रात भर के कारोबार में अमेरिकी बाजार अधिकतर बढ़त के साथ बंद हुए.
चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड के तकनीकी अनुसंधान विश्लेषक आकाश शाह ने कहा, “वॉल स्ट्रीट पर सकारात्मक सत्र के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में तेजी आई, क्योंकि निवेशकों ने बढ़े हुए उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) आंकड़ों को नजरअंदाज करते हुए प्रौद्योगिकी और संचार क्षेत्र के शेयरों में खरीदारी जारी रखी.”
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया संकट को लेकर चिंताओं के चलते गुरुवार को शुरुआती कारोबार में रुपया कमजोर होकर खुला और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 95.86 पर पहुंच गया.
पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद से रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 6 प्रतिशत से अधिक कमजोर हो चुका है, जिससे यह 2026 में अब तक एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गई है.
विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से भारत ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है, लेकिन व्यापारियों का कहना है कि रुपये की चाल सोने से कम और कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया की स्थिति से अधिक प्रभावित होगी.
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.74 पर खुला, फिर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 95.86 पर पहुंच गया. बुधवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सर्वकालिक निचले स्तर 95.80 पर आ गया और रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब 95.66 पर बंद हुआ.
सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के एमडी अमित पबारी ने पीटीआई न्यूज एजेंसी से कहा, “ज्वेलरी शोरूम से लेकर पेट्रोल पंप तक, हर आयातित वस्तु की कीमत बढ़ गई है और रुपये पर इसका असर साफ दिख रहा है.” पबारी ने आगे कहा कि अनिश्चितता को बढ़ाते हुए, भू-राजनीतिक खबरें लगभग हर कुछ घंटों में बाजार की भावना को प्रभावित कर रही हैं.
उन्होंने कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें ईरान विवाद सुलझाने में चीन से मदद की उम्मीद नहीं है, जबकि वाशिंगटन और तेहरान के बीच शांति वार्ता अभी भी रुकी हुई है क्योंकि दोनों पक्ष प्रमुख शर्तों पर सहमत नहीं हैं.” चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने गुरुवार को कहा कि 2026 चीन-अमेरिका संबंधों के लिए “ऐतिहासिक, महत्वपूर्ण वर्ष” होगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल्स में स्वागत किया और उनसे बातचीत की.


