Friday, June 12, 2026

सुरक्षा चिंताओं और ईरान जंग में इस्तेमाल के बाद, भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर एलन मस्क की स्टारलिंक मंजूरी पर रोक लगा दी.

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नई दिल्ली: अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा ‘स्टारलिंक’ को भारत में एक बड़ा झटका लगा है. सुरक्षा एजेंसियों की चिंता के बाद केंद्र सरकार ने स्टारलिंक को मिलने वाली अंतिम व्यावसायिक मंजूरी पर फिलहाल रोक लगा दी है.

ईरान संघर्ष से जुड़ी हैं चिंताएं
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की यह चिंता मध्य पूर्व और ईरान में चल रहे संघर्ष से जुड़ी है. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में बिना किसी आधिकारिक लाइसेंस के भी स्टारलिंक के सैटेलाइट टर्मिनल्स का इस्तेमाल किया गया. इस घटना के बाद भारत सरकार सतर्क हो गई है. नई दिल्ली को डर है कि भविष्य में किसी भू-राजनीतिक तनाव या युद्ध की स्थिति में एक अमेरिकी कंपनी के इंटरनेट नेटवर्क पर नियंत्रण रखना बेहद मुश्किल हो सकता है.

स्पेसएक्स के आईपीओ (IPO) पर असर
यह फैसला एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि कंपनी अमेरिकी शेयर बाजार नैस्डैक पर अपना सबसे बड़ा आईपीओ लाने की तैयारी में है. इस आईपीओ में स्टारलिंक की बहुत बड़ी भूमिका है क्योंकि यह कंपनी की कमाई का मुख्य जरिया है. भारत जैसे बड़े बाजार में मंजूरी न मिलने से कंपनी के वैश्विक विस्तार को नुकसान पहुंचेगा, क्योंकि चीन के बाद अब भारत का विशाल बाजार भी उसके हाथ से निकल सकता है.

स्पेक्ट्रम की नीलामी और अन्य कंपनियां भी फंसीं
इस विवाद के कारण भारत में सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की कीमतों को तय करने वाला प्रस्ताव भी रुक गया है. दूरसंचार विभाग (DoT) ने इस प्रस्ताव को तैयार तो कर लिया है, लेकिन इसे अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय कैबिनेट के पास नहीं भेजा गया है. इसका सीधा असर रिलायंस जियो और भारती एयरटेल जैसी भारतीय कंपनियों पर भी पड़ रहा है, क्योंकि वे भी अपनी सैटेलाइट सेवाओं को शुरू करने के लिए इस नीति का इंतजार कर रही हैं.

भारत सरकार का कड़ा रुख
स्टारलिंक को करीब एक साल पहले भारत में ‘ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट’ (GMPCS) का लाइसेंस मिल गया था. कंपनी ने मुंबई में एक बड़ा हब और देश में लगभग 10 गेटवे भी तैयार कर लिए हैं. स्टारलिंक ने सरकार को भरोसा दिया है कि वह स्थानीय डेटा स्टोरेज के नियमों का पालन करेगी. लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इस बात का ठोस आश्वासन चाहती हैं कि तनाव के समय भारतीय सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन कैसे किया जाएगा. फिलहाल, सरकार ने विदेशी कंपनियों के साथ-साथ घरेलू कंपनियों के यूरोपीय समझौतों की भी जांच कड़ी कर दी है

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