मुंबई: बुधवार को दलाल स्ट्रीट पर सिगरेट कंपनियों के शेयरों में तेज़ी देखी गई. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि कंपनियों ने हाल ही में बढ़ी एक्साइज ड्यूटी का असर ग्राहकों पर डालने के लिए सिगरेट की कीमतों में बढ़ोतरी की है. इस खबर के बाद निवेशकों की खरीदारी बढ़ी और शेयरों में मजबूत उछाल दर्ज हुआ.
गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया लिमिटेड में 15% की छलांग
दोपहर 1:15 बजे तक गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया लिमिटेड का शेयर 318 अंक या 15.4% की बढ़त के साथ 2,386 रुपये पर कारोबार कर रहा था. दो दिनों में कंपनी के शेयर में 15% से अधिक की तेजी देखी गई. निवेशकों को उम्मीद है कि कीमतों में बढ़ोतरी से कंपनी के मुनाफे पर कर वृद्धि का असर सीमित रहेगा.
ITC Ltd और VST Industries Ltd भी मजबूत
आईटीसी लिमिटेड के शेयर में भी 2% की बढ़त दर्ज की गई और यह 331 रुपये तक पहुंच गया. पिछले तीन सत्रों में आईटीसी का शेयर करीब 5.5% चढ़ चुका है. वहीं वीएसटी इंडस्ट्रीज लिमिटेड का शेयर भी लगभग 2–3% मजबूत होकर 244 रुपये पर पहुंच गया.
कीमतों में 20–40% तक बढ़ोतरी संभव
रिपोर्ट्स के अनुसार, आईटीसी अलग-अलग ब्रांड्स में सिगरेट की कीमतों में 20% से 40% तक की बढ़ोतरी कर सकती है. नई कीमतों के साथ ताजा खेप जल्द ही बाजार में पहुंचने की संभावना है. बताया जा रहा है कि कुछ रिटेलर्स पुराने स्टॉक को भी बढ़ी हुई कीमत पर बेच रहे हैं.
नई कर व्यवस्था का असर
सरकार ने 1 फरवरी को जीएसटी मुआवजा उपकर समाप्त कर तंबाकू उत्पादों के लिए नई कर व्यवस्था लागू की है. इसके तहत सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी 2,050 रुपये से 8,500 रुपये प्रति 1,000 स्टिक तय की गई है, साथ ही 40% जीएसटी भी लागू है. इससे कुल कर बोझ बढ़ा है, जिससे मांग और अवैध व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं.
बजट में नेशनल कैलामिटी कंटिन्जेंट ड्यूटी (NCCD) की वैधानिक दर 25% से बढ़ाकर 60% कर दी गई है, जो 1 मई 2026 से प्रभावी होगी. हालांकि, फिलहाल प्रभावी दर 25% ही रहेगी, इसलिए तुरंत कर बोझ नहीं बढ़ेगा. सरकार ने भविष्य में दर बढ़ाने का विकल्प खुला रखा है.
मार्जिन पर दबाव, लेकिन राहत की उम्मीद
दिसंबर तिमाही में आईटीसी ने सालाना आधार पर 6.2% राजस्व वृद्धि दर्ज की. सिगरेट कारोबार में 8% की आय वृद्धि हुई, जो 7% वॉल्यूम ग्रोथ के कारण संभव हुई. हालांकि, सिगरेट सेगमेंट का मार्जिन घटकर 59.9% रह गया, जो कई तिमाहियों का निचला स्तर है. इसका मुख्य कारण महंगे कच्चे माल का उपयोग रहा.
प्रबंधन के अनुसार, चालू फसल चक्र में पत्ती की खरीद कीमतें कम हुई हैं, जिससे आने वाली तिमाहियों में मार्जिन में सुधार की संभावना है.


