सारण, 14 अक्टूबर 2026: बिहार में विद्यालयी शिक्षा को तकनीक से जोड़ने की दिशा में सारण जिले के एकमा में शिक्षकों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर आधारित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। अलख नारायण सिंह उच्च माध्यमिक विद्यालय में हुए इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को एआई टूल्स के इस्तेमाल की जानकारी देना और कक्षा में आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देना था।
माइक्रोसॉफ्ट एजुकेटर्स सशक्तीकरण कार्यक्रम के तहत आयोजित प्रशिक्षण में एकमा प्रखंड के मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों से एक-एक शिक्षक ने हिस्सा लिया।
AI से पाठ योजना और शिक्षण सामग्री बनाने का प्रशिक्षण
प्रशिक्षण का नेतृत्व पिरामल फाउंडेशन के एआई दूत सुधांशु रंजन ने किया। सारिका द्विवेदी ने मास्टर फैसिलिटेटर की भूमिका निभाई। इसके अलावा डॉ. कौशल कुमार पाण्डेय, डॉ. शशि भूषण शाही और रविस कुमार समेत विभिन्न विद्यालयों से चयनित मास्टर प्रशिक्षकों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को एआई आधारित शैक्षणिक उपकरणों के इस्तेमाल, पाठ योजना तैयार करने और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी शिक्षण सामग्री विकसित करने के तरीके बताए गए। व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से समझाया गया कि तकनीक की मदद से पढ़ाई को अधिक सरल, रोचक और विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुरूप कैसे बनाया जा सकता है।
AI के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर
कार्यक्रम में एआई के सुरक्षित, जिम्मेदार और उद्देश्यपूर्ण उपयोग को भी महत्वपूर्ण बताया गया। इसका मकसद शिक्षकों की डिजिटल दक्षता बढ़ाना और उन्हें नई तकनीकों के माध्यम से शिक्षण कार्य को बेहतर बनाने के लिए तैयार करना है।
एआई टूल्स के उपयोग से शिक्षक पाठ्य सामग्री तैयार करने और कक्षा की गतिविधियों की योजना बनाने में सहायता ले सकते हैं। हालांकि, तैयार सामग्री की शुद्धता और विद्यार्थियों के लिए उसकी उपयुक्तता की जांच करना भी जरूरी है।
मास्टर ट्रेनर दूसरे शिक्षकों को भी देंगे प्रशिक्षण
कार्यक्रम के बाद चयनित मास्टर प्रशिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में अन्य शिक्षकों को भी एआई के उपयोग से जुड़ी जानकारी देंगे। इससे प्रशिक्षण में सीखे गए तरीकों को अधिक शिक्षकों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
यह पहल बिहार शिक्षा परियोजना और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), बिहार के सहयोग से पिरामल फाउंडेशन द्वारा संचालित शैक्षिक क्षमता विकास प्रयासों का हिस्सा है। इस कार्यक्रम के जरिए विद्यालयों में तकनीक आधारित शिक्षण, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा गया है।
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