Friday, October 23, 2026

साढ़े तीन एकड़ में 8 फसलों की खेती देख कृषि निदेशक ने की सराहना, किसानों ने बताईं समस्याएं.

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धनबाद | 23 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS

झारखंड के धनबाद जिले में आधुनिक और मिश्रित खेती को बढ़ावा देने की पहल के बीच कृषि विभाग के निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने पूर्वी टुंडी प्रखंड के भोजपुर गांव में प्रगतिशील किसान शिशिर गोराई के खेतों का निरीक्षण किया। करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन पर अलग-अलग फसलों की खेती देखकर उन्होंने किसान के प्रयासों की सराहना की। इस दौरान किसानों ने फसलों को मवेशियों से बचाने, सिंचाई की सुविधा बढ़ाने और समय पर उन्नत बीज उपलब्ध कराने की मांग भी रखी।

एक ही खेत में सब्जियों से लेकर हल्दी-अदरक तक की खेती

किसान शिशिर गोराई करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन पर आधुनिक तरीके से विविध फसलों की खेती कर रहे हैं। उनके खेतों में बैंगन, करेला, खीरा, हल्दी, अदरक, गेंदा फूल, केला और नेनुआ उगाए जा रहे हैं।

कृषि निदेशक ने खेतों का निरीक्षण कर विभिन्न फसलों और खेती के तौर-तरीकों की जानकारी ली। एक ही कृषि क्षेत्र में कई तरह की फसलें लगाने के इस प्रयास को उन्होंने सराहा।

मिश्रित खेती का यह मॉडल आसपास के दूसरे किसानों को भी अपनी जमीन और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार अलग-अलग फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है। हालांकि, इससे होने वाला वास्तविक लाभ फसल की पैदावार, बाजार में कीमत और खेती की लागत पर निर्भर करेगा।

मवेशियों से फसल बचाना किसानों के सामने बड़ी चुनौती

निरीक्षण के दौरान किसान शिशिर गोराई और धर्मेंद्र कुमार सिंह ने खेती से जुड़ी समस्याएं कृषि निदेशक के सामने रखीं। किसानों ने बताया कि खुले में घूमने वाले मवेशी खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे मेहनत और लागत के बावजूद किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

किसानों ने खेतों की सुरक्षा के लिए घेराबंदी कराने की मांग की। उनका कहना था कि फसलों को मवेशियों से बचाने की उचित व्यवस्था होने से नुकसान कम करने में मदद मिलेगी।

डीप बोरिंग और समय पर उन्नत बीज उपलब्ध कराने की मांग

किसानों ने सिंचाई की सुविधा बेहतर बनाने के लिए डीप बोरिंग कराने की जरूरत भी बताई। उनका कहना था कि पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से फसलों की देखभाल और उत्पादन में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा किसानों ने खेती के अनुकूल समय पर उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराने की मांग की। किसानों के अनुसार, बीज समय पर नहीं मिलने से बुआई प्रभावित हो सकती है। इसलिए कृषि विभाग से बीज वितरण की व्यवस्था समयबद्ध बनाने की अपेक्षा की गई।

कृषि निदेशक ने दिया सहायता का आश्वासन

किसानों की समस्याएं सुनने के बाद कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने उन्हें हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। उन्होंने समय पर बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास करने की बात कही।

निदेशक के धनबाद दौरे के दौरान जिला कृषि पदाधिकारी अंजना कुमारी सहित कृषि विभाग की टीम भी मौजूद थी। अधिकारियों ने खेतों में चल रही खेती की गतिविधियों को देखा और किसानों से उनकी जरूरतों के बारे में जानकारी ली।

जिले में पांच विशेष टीमें कर रहीं खेती की स्थिति का आकलन

कृषि निदेशक ने बताया कि जिले में पांच विशेष टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर खेती की स्थिति का जायजा ले रही हैं और किसानों से फीडबैक प्राप्त कर रही हैं।

इसका उद्देश्य खेतों में सामने आ रही व्यावहारिक समस्याओं को समझना और किसानों की जरूरतों के अनुरूप योजनाओं को आगे बढ़ाना है। किसानों की मांगों के आधार पर विभागीय स्तर पर किस तरह की कार्रवाई होगी, यह आगे स्पष्ट होगा।

किसानों को अब ठोस कार्रवाई का इंतजार

भोजपुर गांव में कृषि निदेशक के दौरे से किसानों को अपनी समस्याएं सीधे विभाग के अधिकारियों तक पहुंचाने का अवसर मिला। मिश्रित खेती के जरिए सीमित जमीन पर अलग-अलग फसलें उगाने का प्रयास क्षेत्र के किसानों के लिए एक उदाहरण बन सकता है।

हालांकि, किसानों को वास्तविक राहत तभी मिलेगी, जब खेतों की घेराबंदी, सिंचाई सुविधा और उन्नत बीजों की उपलब्धता जैसी मांगों पर ठोस पहल होगी। फिलहाल किसानों की निगाहें कृषि विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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