Wednesday, July 1, 2026

साइंस में छिपी है वजह – महीने में इन फूड्स को खाने की भी है मनाही

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सावन का महीना (Sawan 2025 Food Tips) जो भगवान शिव को समर्पित है 11 जुलाई से शुरू हो रहा है। इस दौरान दूध-दही और बैंगन जैसे कुछ फूड्स को खाने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। इसके पीछे धार्मिक कारणों के साथ वैज्ञानिक कारण भी हैं। आइए जानते हैं सावन में क्यों नहीं खाने चाहिए ये फूड्स।

शुक्रवार यानी 11 जुलाई से सावन (sawan 2025) का महीना शुरू हो रहा है। यह हिंदू कैलेंडर का पांचवां महीना होता है, जो धार्मिक दृष्टि से काफी अहम माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक यह महीना भगवान शिव को समर्पित है और इस दौरान उनकी पूजा-अर्चना करने से भोलेबाबा की विशेष कृपा मिलती है।

आध्यात्मिक लिहाज से इस महीने में कई सारी चीजों की मनाही होती हैं। इन्हीं में से एक कुछ फूड्स को न खाना है। इस मौसम में अक्सर दूध-दही, बैंगन जैसे कई सारे फूड्स (Sawan 2025 Food Tips) को खाने से परहेज करने को कहा जाता है। इसके पीछे धार्मिक कारण तो है ही, साथ ही इसकी वैज्ञानिक वजह भी है। आइए जानते हैं इन फूड्स को न खाने के पीछे का साइंस-

सावन में नहीं खाते बैंगन-पत्तेदार सब्जियां

आपने अक्सर बड़े-बुजुर्गों से सुना होगा कि सावन के दिनों पत्तेदार साग और बैंगन नहीं खाना चाहिए, लेकिन क्या आपने कभी इसे न खाने की वजह जानने की कोशिश की। अगर नहीं, तो चलिए हम आपको इसकी वजह बताते हैं। दरअसल, सावन यानी बरसात के दिनों में चारों तरफ बारिश की वजह से नमी रहती है, जो कई तरह के इन्फेक्शन फैलाने वाले जीवाणु के पनपने के लिए सही वातावरण बनाता है।

साथ ही इस मौसम में कई तरह के कीड़े-मकौड़े भी निकलने लगते हैं, जो  बैंगन छिप रहते हैं, जिससे इन्हें खाने से सेहत को नुकसान हो सकता है। इसके अलावा बैंगन काफी हैवी होता है, जिसे पचाना मुश्किल होता है।

दूध-दही और कढ़ी न खाने का कारण

इस मौसम में अक्सर दूध-दही, कढ़ी और रायता खाने की भी मनाही होती है। इसके पीछे धार्मिक कारण के साथ-साथ वैज्ञानिक कारण भी है। दरअसल, सावन यानी बरसात के दिनों में नमी की वजह से हर तरफ बैक्टीरिया और कीटाणु होते हैं और ऐसे मौसम में इन फूड्स को खाने से गैस, एसिडिटी, अपच  हो सकती हैं।

साथ ही भारी होने की वजह से इन फूड्स को पचाना भी मुश्किल होता है, जिससे पाचन पर बुरा असर पड़ता है। वहीं, दूध के लिए इसलिए मना किया जाता है, क्योंकि बरसात में जानवर जिस घास या चारे को खाते हैं, उसमें भी कीड़े-मकोड़े छिपे हो सकते हैं, जिससे दूध की शुद्धता पर असर पड़ता है और सेहत को नुकसान पहुंच सकता है।

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