Monday, September 28, 2026

शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,124 अंक टूटा; निफ्टी भी 360 अंक लुढ़का.

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मुंबईः भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक बाजारों में कमजोरी के बीच घरेलू बाजार के प्रमुख सूचकांक छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए। कारोबार खत्म होने पर सेंसेक्स 1,124.02 अंक यानी 1.52% गिरकर 72,771.72 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 360.25 अंक यानी 1.56% टूटकर 22,780.25 के स्तर पर पहुंच गया।

बाजार में चौतरफा गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति में भी बड़ी कमी दर्ज की गई।

रुपये पर भी दबाव, डॉलर के मुकाबले 96 पर बंद

शेयर बाजार के साथ भारतीय मुद्रा पर भी दबाव रहा। डॉलर में मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच रुपया 0.19% कमजोर होकर 96.00 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ।

बाजार में कमजोरी का असर बड़े शेयरों के अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दिखाई दिया।

इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा गिरावट

निफ्टी में शामिल शेयरों में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (TMPV), पावर ग्रिड और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में रहे।

भारतीय बाजार तक ही बिकवाली सीमित नहीं रही। एशिया के कई प्रमुख शेयर बाजारों में भी कमजोरी दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया, चीन और जापान के बाजारों में भी गिरावट का दबाव देखा गया।

पश्चिम एशिया में तनाव से बढ़ी बाजार की चिंता

बाजार में गिरावट के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव प्रमुख कारणों में रहा। खबर के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

प्रस्ताव में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने और दुश्मनी कम करने से जुड़ी बातें शामिल थीं। तनाव बढ़ने की आशंका के बीच निवेशकों में जोखिम को लेकर सतर्कता बढ़ी।

कच्चे तेल की कीमत 106.6 डॉलर प्रति बैरल

वैश्विक तनाव के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका से इसकी कीमतों में तेजी आई। ब्रेंट क्रूड 2.2% बढ़कर 106.6 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था, आयात लागत और कंपनियों के खर्च पर दबाव पड़ सकता है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने का भी असर

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने भी उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ाया। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में 10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड 5.20%, जबकि 2 साल के नोट की यील्ड 4.90% तक पहुंच गई।

अमेरिकी बाजार में अपेक्षाकृत बेहतर रिटर्न मिलने पर विदेशी निवेशकों की ओर से उभरते बाजारों में निवेश घटाने का दबाव बन सकता है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।

सितंबर में FPI ने बेचे ₹17,131 करोड़ के शेयर

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में अब तक FPI करीब ₹17,131 करोड़ के भारतीय शेयर बेच चुके हैं।

वहीं, 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की कुल बिकवाली ₹2.41 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी है। बाजार में लगातार विदेशी निकासी के बीच सोमवार को घरेलू शेयरों में भी व्यापक बिकवाली देखने को मिली।

BharatSuperFastNews | बिजनेस डेस्क

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