मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 30 सितंबर 2026 को कारोबार की शुरुआत हल्की गिरावट के साथ हुई। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली का असर शुरुआती कारोबार में देखने को मिला।
शुरुआती मिनटों में सेंसेक्स 87.92 अंक गिरकर 72,441.15 पर खुला। वहीं निफ्टी 50 करीब 50 अंक यानी 0.23% की गिरावट के साथ 22,665 के आसपास कारोबार की शुरुआत करता दिखा।
आईटी और टेलीकॉम शेयरों में खरीदारी
बाजार की कमजोर शुरुआत के बावजूद कुछ सेक्टर में खरीदारी का रुझान रहा।
- आईटी और टेलीकॉम से जुड़े शेयरों में तेजी देखने को मिली।
- निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 1% से अधिक चढ़ा।
- पीएसयू बैंक, केमिकल्स, ऑयल एंड गैस, सीमेंट और मीडिया इंडेक्स भी बढ़त में रहे।
- दूसरी ओर मेटल इंडेक्स करीब 0.42% नीचे रहा।
- हेल्थकेयर और फार्मा शेयरों में भी शुरुआती कारोबार में हल्का दबाव नजर आया।
FII की लगातार चौथे दिन बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली बाजार के लिए प्रमुख चिंता बनी हुई है। उपलब्ध प्रोविजनल आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को FII ने करीब 10,000 करोड़ रुपये की भारतीय इक्विटी बेची।
यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र रहा, जब विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली दर्ज की गई।
हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाजार को सहारा दिया। आंकड़ों के अनुसार, DII ने करीब 7,000 करोड़ रुपये की खरीदारी की।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर भी बाजार की नजर
बाजार में विदेशी निवेशकों के रुख पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का असर भी देखा जा रहा है। यील्ड ऊंची रहने की स्थिति में विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियों का आकर्षण बढ़ सकता है, जिससे उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का दबाव बन सकता है।
इसी वजह से घरेलू बाजार में निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाते नजर आ रहे हैं।
निफ्टी के लिए 22,650-22,700 अहम स्तर
तकनीकी स्तरों की बात करें तो पिछले कारोबारी सत्र में निफ्टी में हैमर कैंडल बनने का उल्लेख बाजार विश्लेषण में किया गया है। इसे निचले स्तरों पर खरीदारी की मौजूदगी के संकेत के तौर पर देखा जाता है।
विश्लेषण के अनुसार:
- तत्काल सपोर्ट: 22,650-22,700
- प्रमुख रेजिस्टेंस: 22,950-23,000
आने वाले कारोबार में इन स्तरों के आसपास बाजार की चाल पर नजर रहेगी।
क्रूड ऑयल की कीमतें भी रहेंगी महत्वपूर्ण
भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतें भी एक अहम कारक हैं। तेल की कीमतों में नरमी आने पर भारत के आयात बिल और महंगाई से जुड़े दबाव में कमी की उम्मीद बन सकती है। हालांकि, बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक संकेतों, FII-DII गतिविधियों और कंपनियों के प्रदर्शन समेत कई कारक महत्वपूर्ण रहेंगे।
नोट: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश का निर्णय लेने से पहले आधिकारिक आंकड़ों और योग्य वित्तीय सलाहकार की सलाह पर विचार करें।
