28 जुलाई को मंगल ग्रह का कन्या राशि में प्रवेश एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है, क्योंकि इसके साथ ही शनि और मंगल के बीच समसप्तक योग बनने जा रहा है. दिल्ली के प्रसिद्ध वैदिक ज्योतिषाचार्य और वास्तु एक्सपर्ट आदित्य झा के अनुसार, यह योग तब बनता है जब दो ग्रह एक-दूसरे से सातवें भाव में स्थित होते हैं. शनि इस समय मीन राशि में विराजमान हैं और जैसे ही मंगल कन्या राशि में पहुंचेंगे, दोनों ग्रह सातवें भाव की स्थिति में आ जाएंगे.
ज्योतिष में शनि और मंगल को क्रूर ग्रह माना जाता है, और जब ये एक-दूसरे से आमने-सामने होते हैं, तो टकराव की स्थिति पैदा होती है. यह योग विशेष रूप से कुछ राशियों के लिए तनाव, बीमारी, आर्थिक नुकसान और पारिवारिक कलह का कारण बन सकता है.
मेष राशि वालों के लिए हो सकते हैं कठिन दिन
ज्योतिषाचार्य का कहना है कि, मेष राशि के जातकों के लिए यह योग विशेष रूप से सतर्कता की मांग करता है. मंगल इनकी राशि के छठे भाव में स्थित होंगे, जो रोग और शत्रु का भाव माना जाता है. वहीं शनि बारहवें भाव में स्थित हैं, जो हानि और व्यय का संकेत देता है. इस स्थिति में मेष राशि के लोगों को फिजूलखर्ची, कोर्ट-कचहरी के मामलों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. इस दौरान छोटी-छोटी बातों पर विवाद बढ़ सकते हैं और मानसिक तनाव भी अधिक रह सकता है.
मिथुन राशि में बढ़ सकती हैं पारिवारिक चुनौतियां
मंगल का गोचर मिथुन राशि के चतुर्थ भाव में होगा, जो पारिवारिक जीवन, माता, संपत्ति और सुख का भाव माना जाता है. इस स्थिति में पारिवारिक कलह की आशंका है, विशेषकर माता से मतभेद हो सकते हैं. आर्थिक मामलों में भी तनाव रहेगा और वाहन या संपत्ति से जुड़ा कोई विवाद उत्पन्न हो सकता है. संवाद के दौरान संयम बनाए रखना अत्यंत आवश्यक होगा, अन्यथा संबंधों में दूरी आ सकती है.
कर्क राशि पर ग्रहों का विशेष प्रभाव
कर्क राशि की कुंडली में इस समय ग्रहों की स्थिति विशेष रूप से असंतुलित दिखाई दे रही है. सूर्य इस राशि में स्थित हैं, और जल्द ही केतु दूसरे भाव में प्रवेश करेंगे. साथ ही मंगल तीसरे, राहु अष्टम और शनि नवम भाव में रहेंगे, जिससे पांच ग्रहों का टकराव स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा. इसका प्रभाव स्वास्थ्य पर गंभीर रूप से पड़ सकता है, और मानसिक रूप से भी तनाव और चिंता बढ़ सकती है. करियर और रिश्तों में भी अस्थिरता का अनुभव होगा.
उपायों से पा सकते हैं राहतहालांकि यह योग कुछ राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण है, लेकिन उचित ज्योतिषीय उपायों और साधना से इसका प्रभाव कम किया जा सकता है. मंगल और शनि से संबंधित मंत्रों का जाप, मंगलवार और शनिवार को दान, और संयमित व्यवहार इन स्थितियों को सहज बनाने में मदद कर सकते हैं. साथ ही किसी अनुभवी वैदिक ज्योतिषी की सलाह अवश्य लें ताकि आपकी कुंडली के अनुसार व्यक्तिगत उपाय भी किए जा सकें.


