Friday, April 17, 2026

वैश्विक टेक सेक्टर में बड़ी छंटनी, 2026 की पहली तिमाही में 80,000 कर्मचारियों की छुट्टी,साल के अंत तक आंकड़ा 3 लाख पार होने की आशंका

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नई दिल्ली: वैश्विक तकनीकी क्षेत्र के लिए साल 2026 की शुरुआत काफी चुनौतीपूर्ण रही है. एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस साल की पहली तिमाही (Q1) में ही दुनिया भर की दिग्गज तकनीकी कंपनियों ने 80,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि छंटनी की यही रफ्तार जारी रही, तो इस साल कुल छंटनी का आंकड़ा 3 लाख के पार पहुंच सकता है.

प्रमुख कंपनियों ने की भारी कटौती
रिपोर्ट के मुताबिक, इस छंटनी का नेतृत्व ओरेकल, अमेज़न और मेटा जैसी दिग्गज कंपनियों ने किया है. ओरेकल ने अपने एआई (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए अब तक की सबसे बड़ी छंटनी करते हुए लगभग 25,000 पदों को समाप्त कर दिया है. वहीं, अमेज़न ने परिचालन दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से 16,000 कर्मचारियों की कटौती की है. मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा ने भी लगभग 2,400 पदों को खत्म किया है.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बना मुख्य कारण
दिलचस्प बात यह है कि 2026 में हो रही लगभग 50 प्रतिशत छंटनी का सीधा संबंध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन से है. कंपनियां अब अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा मानव संसाधनों से हटाकर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर्स की ओर मोड़ रही हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह छंटनी केवल ऑटोमेशन के कारण नहीं, बल्कि एआई में निवेश के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से की गई एक ‘निवारक लागत कटौती’ है.

अमेरिका सबसे अधिक प्रभावित, भारत की स्थिति
वैश्विक स्तर पर अमेरिका सबसे अधिक प्रभावित बाजार बना हुआ है. कुल छंटनी का लगभग 77 प्रतिशत हिस्सा (61,000+ नौकरियां) अकेले अमेरिकी बाजार से है. इसके विपरीत, भारत में अब तक लगभग 2,000 कर्मचारियों की छंटनी दर्ज की गई है, जो मुख्य रूप से ई-कॉमर्स और एआई स्टार्टअप्स से जुड़ी है. यूरोप में नीदरलैंड और स्वीडन जैसे देशों में भी सेमीकंडक्टर और आईटी सेवाओं में गिरावट देखी गई है.

सेक्टर-वार प्रभाव
सेक्टर के नजरिए से देखें तो क्लाउड कंप्यूटिंग और SaaS (Software-as-a-Service) कंपनियों में सबसे ज्यादा 28,000 नौकरियां गईं. इसके बाद ई-कॉमर्स क्षेत्र का नंबर आता है, जहाँ 19,000 से अधिक लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘पोस्ट-पेंडमिक सुधार’ का हिस्सा है. कंपनियां अब तेजी से बदलती तकनीक के साथ खुद को ढाल रही हैं, जिससे रोजगार के पारंपरिक ढांचे में बदलाव अनिवार्य हो गया है.

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