लोहरदगा: जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था बीमार है. सदर अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और दूसरे अस्पतालों की हालत खस्ताहाल है. मरीज को समय पर बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है. हालत ऐसी है कि अस्पताल भवन तो बने हुए हैं, लेकिन खंडहर में तब्दील हो रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर के सहारे स्वास्थ्य व्यवस्था की गाड़ी चल रही है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में समय पर डॉक्टर नहीं मिलते. इसको लेकर ईटीवी भारत ने लोहरदगा जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की पड़ताल की है.
स्वास्थ्य केंद्रों पर समय पर नहीं मिलता इलाज
सदर अस्पताल, 78 आयुष्मान आरोग्य मंदिर और 10 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र. कहने को लोहरदगा में अस्पतालों की कमी नहीं है, लेकिन जब बात इलाज की आती है, तब मरीजों को सदर अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है. ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूती देने के लिए सरकार ने आयुष्मान आरोग्य मंदिर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ-साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था रखी है. जब मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं, तो ना समय पर डॉक्टर मिलते हैं और ना ही आपात स्थिति में एंबुलेंस ही मिल पाता है.
14 साल से बंद है उगरा पीएचसी भवन
अभी भी कई अस्पतालों का निर्माण चल रहा है. समय पर इलाज उपलब्ध नहीं हो पाने की वजह से कई बार मरीजों को विकट स्थिति का सामना करना पड़ता है. जिले के उगरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन 14 साल पहले निर्माण कराया गया था. दुर्भाग्यपूर्ण रूप से आज तक यह अस्पताल शुरू नहीं हो सका है. महत्वपूर्ण बात है कि अस्पताल के रखरखाव और मरम्मत के नाम पर हर साल पैसे खर्च होते हैं. अस्पताल के आसपास रहने वाले ग्रामीण तो अपने आप को ठगा महसूस करते हैं. उनके घर के सामने अस्पताल का भवन जरूर है, लेकिन इलाज कई मील दूर जाकर कराना पड़ता है.
4 डॉक्टर्स के भरोसे सेन्हा के सभी सीएचसी और पीएचसी
ऐसा ही हाल सेन्हा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की भी है. केंद्र में अत्याधुनिक मशीन और जांच की सुविधा मौजूद है. लेकिन समय पर डॉक्टर नहीं मिलते. मेडिकल स्टाफ की भी समुचित व्यवस्था नहीं है. सेन्हा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 4 एमबीबीएस डॉक्टर हैं. इसके अलावा ना तो कोई सर्जन है और ना ही कोई विशेषज्ञ डॉक्टर. लोहरदगा जिले के 10 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की कुछ ऐसा ही हालत है. नाम मात्र के यह अस्पताल आज खुद बीमार दिखाई देते हैं.

आयुष्मान आरोग्य के सहारे स्वास्थ्य व्यवस्था
जिले में आयुष्मान आरोग्य मंदिर के सहारे ही स्वास्थ्य व्यवस्था की गाड़ी चल रही है. लेकिन यह भी सच है कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर में मरीजों को सिर्फ टीकाकरण जैसी सुविधा ही मिल पाती है. जिससे जिलावासियों को लोहरदगा सदर अस्पताल पर ही निर्भर रहना पड़ता है. लेकिन सदर अस्पताल में भी हड्डी का ऑपरेशन सहित दूसरी सुविधाएं नहीं हैं. 108 एंबुलेंस की सुविधा भी समय पर नहीं मिल पाती. कई बार विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. मरीजों को निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है.

जिले के सीएचसी और पीएचसी में कुल चार ही डॉक्टर हैं: सीएस
इस पूरे मामले को लेकर सिविल सर्जन ने कहा कि सेन्हा से सभी स्वास्थ्य केंद्रों में पारा मेडिकल स्टाफ की कमी है. डॉक्टरों की भी कमी है. सिविल सर्जन ने कहा कि सेन्हा के सारे सीएचसी और पीएचसी में चार ही डॉक्टर है. इन्ही चार डॉक्टर्स को सीएचसी और पीएचसी 24 घंटा देखना होता है. जिसके कारण लोगों को इलाज के लिए समस्या होती है.


