रांची: रिम्स के सर्जरी वार्ड सी-2 में इलाज के दौरान एक मरीज की मौत के बाद रविवार को विवाद की स्थिति बन गई। मृतक के परिजनों और जूनियर डॉक्टरों के बीच मारपीट होने के बाद पीजी डॉक्टरों ने मरीजों को देखने से इनकार कर दिया। इसके चलते अस्पताल में इलाज व्यवस्था प्रभावित हुई।
फिलहाल रिम्स में मरीजों की देखभाल का जिम्मा मुख्य रूप से सीनियर और रेजिडेंट डॉक्टर संभाल रहे हैं।
डॉक्टरों ने सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
रिम्स जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार ने घटना पर नाराजगी जताते हुए डॉक्टरों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि अस्पताल में चिकित्सकों के साथ लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण डॉक्टरों के लिए काम करना मुश्किल हो रहा है।
डॉ. जितेंद्र के अनुसार, जिस मरीज की इलाज के दौरान मौत हुई, उसकी हालत पहले से गंभीर थी। डॉक्टरों का दावा है कि मरीज के इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पहुंचे परिजनों और अन्य लोगों ने चिकित्सकों के साथ मारपीट की।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के दौरान अस्पताल में तैनात सुरक्षा कर्मियों ने डॉक्टरों को बचाने के लिए प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया।
मृतक को थी पैंक्रियाटाइटिस की गंभीर समस्या
रिम्स के सर्जरी विभाग के सह विभागाध्यक्ष डॉ. निशीथ ने बताया कि मृतक मरीज पैंक्रियाटाइटिस से पीड़ित था और उसकी स्थिति गंभीर थी। उनके मुताबिक मरीज का इलाज चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार किया जा रहा था।
उन्होंने डॉक्टरों के साथ मारपीट की घटना पर कार्रवाई की मांग की है। उनके अनुसार, घटना में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कदम उठाया जाना चाहिए।
मारपीट में मरीज का परिजन भी घायल
विवाद के दौरान मृतक के एक परिजन के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। पुलिस ने उन्हें मौके से सुरक्षित निकाला और इलाज के लिए रिम्स के इमरजेंसी विभाग में पहुंचाया, जहां उनका उपचार कराया जा रहा है।
इससे घटना में दोनों पक्षों के लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आई है।
कार्य बहिष्कार से मरीजों की परेशानी बढ़ी
जूनियर डॉक्टरों के काम से अलग रहने के कारण अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बाहर से एंबुलेंस के जरिए लाए गए कुछ गंभीर मरीजों को भी इलाज के लिए इंतजार करना पड़ा।
रिम्स में फिलहाल सीनियर और रेजिडेंट डॉक्टर मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था संभाल रहे हैं। जूनियर डॉक्टरों की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए गए सवालों के बीच अस्पताल प्रशासन के सामने इलाज व्यवस्था सामान्य बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।
घटना के बाद डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों के बीच हुए विवाद की परिस्थितियों को लेकर जांच और आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
