रांची, झारखंड | 12 अक्टूबर 2026
झारखंड की राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में इलाज कराने आने वाले मरीजों, उनके परिजनों और एंबुलेंस को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने की दिशा में पहल की गई है। अस्पताल परिसर और आसपास की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए फ्लाईओवर, अंडरपास और वैकल्पिक सड़क निर्माण का प्रस्ताव सामने आया है। इस योजना का उद्देश्य अस्पताल के भीतर वाहनों का दबाव कम करना और आपातकालीन सेवाओं के लिए आवागमन आसान बनाना है।
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने इस संबंध में पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। पत्र की एक प्रति रिम्स निदेशक को भी भेजी गई है।
RIMS News: अस्पताल परिसर में क्यों होती है जाम की समस्या?
वर्तमान में रिम्स परिसर के बीच से होकर कोकर की ओर जाने वाली सड़क गुजरती है। इस कारण अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और एंबुलेंस के साथ-साथ आम वाहनों का दबाव भी इसी मार्ग पर रहता है। इससे अस्पताल के अंदर और आसपास यातायात प्रभावित होने की स्थिति बनती है।
रिम्स झारखंड के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल है। यहां राज्य के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। ऐसे में सड़क पर वाहनों की भीड़ होने से मरीजों को एक चिकित्सा इकाई से दूसरी इकाई तक ले जाने में परेशानी हो सकती है।
विशेष रूप से गंभीर मरीजों को लेकर आने वाली एंबुलेंस के लिए निर्बाध रास्ता उपलब्ध होना जरूरी है। प्रस्तावित यातायात सुधार का एक प्रमुख उद्देश्य इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए अस्पताल परिसर में आवागमन को सुगम बनाना है।
रिम्स के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों को जोड़ने की योजना
प्रस्ताव के अनुसार, रिम्स परिसर के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने के लिए फ्लाईओवर या अंडरपास बनाने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। इससे अस्पताल के अलग-अलग हिस्सों में स्थित चिकित्सा इकाइयों तक पहुंचने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
रिम्स परिसर में ट्रॉमा सेंटर, सुपर स्पेशियलिटी विभाग और अन्य चिकित्सा इकाइयां अलग-अलग स्थानों पर हैं। बेहतर सड़क संपर्क होने से मरीजों को एक विभाग से दूसरे विभाग तक ले जाने तथा डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के आवागमन में मदद मिल सकती है।
हालांकि, यह फिलहाल प्रस्तावित व्यवस्था है। फ्लाईओवर या अंडरपास में से किस विकल्प को अंतिम रूप दिया जाएगा, इसकी जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है।
बरियातू रोड से कोकर जाने वाले वाहनों के लिए बनेगा वैकल्पिक रास्ता
योजना में बरियातू रोड स्थित रिम्स गेट से कोकर की ओर जाने वाले वाहनों के लिए अलग फ्लाईओवर और सड़क बनाने का प्रस्ताव भी शामिल है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे वाहनों को अस्पताल परिसर में प्रवेश किए बिना अपने गंतव्य तक पहुंचने का विकल्प देना है। इससे रिम्स के भीतर आम वाहनों की आवाजाही कम हो सकती है और अस्पताल परिसर में यातायात का दबाव घटाने में मदद मिल सकती है।
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है और निर्माण पूरा होता है, तो अस्पताल आने वाले मरीजों तथा आम राहगीरों के लिए यातायात व्यवस्था अधिक सुविधाजनक बनाने की संभावना है।
एंबुलेंस और गंभीर मरीजों को मिल सकती है बड़ी राहत
अस्पताल परिसर में ट्रैफिक जाम की समस्या केवल आम लोगों के लिए परेशानी नहीं है, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को भी प्रभावित कर सकती है। गंभीर मरीजों को समय पर ट्रॉमा सेंटर या संबंधित चिकित्सा विभाग तक पहुंचाना कई बार बेहद जरूरी होता है।
प्रस्तावित फ्लाईओवर, अंडरपास और वैकल्पिक सड़क से यातायात का बेहतर प्रबंधन संभव हो सकता है। इससे एंबुलेंस के लिए रास्ता उपलब्ध कराने और अस्पताल की विभिन्न चिकित्सा इकाइयों के बीच आवागमन को सुगम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, मरीजों को वास्तविक राहत कितनी मिलेगी, यह अंतिम योजना, निर्माण की संरचना और यातायात प्रबंधन की व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
प्रस्ताव को मंजूरी और निर्माण की समयसीमा पर नजर
स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई इस पहल का उद्देश्य रिम्स के अंदर और आसपास यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना है। इसके लिए पथ निर्माण विभाग की ओर से आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित परियोजनाओं की अंतिम स्वीकृति, बजट, विस्तृत निर्माण योजना और काम शुरू होने की तारीख की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि फ्लाईओवर या अंडरपास का निर्माण कब शुरू होगा।
RIMS Flyover Proposal: आगे क्या होगा?
रांची के रिम्स में फ्लाईओवर, अंडरपास और वैकल्पिक सड़क का प्रस्ताव अस्पताल परिसर में लंबे समय से महसूस की जा रही यातायात संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर अहम माना जा रहा है। यदि योजना को मंजूरी मिलती है और इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो मरीजों, एंबुलेंस, स्वास्थ्यकर्मियों और आम वाहन चालकों को राहत मिल सकती है।
अब सबकी नजर पथ निर्माण विभाग की अगली कार्रवाई और प्रस्ताव पर होने वाले निर्णय पर रहेगी।
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