Thursday, July 16, 2026

मानसून में बढ़ते हैं सर्पदंश के मामले, जानिए झारखंड में कितने जहरीले और कितने विषहीन सांप पाए जाते हैं.

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रांची: मानसून के आगमन के साथ ही झारखंड में सांपों के दिखने और सर्पदंश की घटनाओं में वृद्धि होने लगती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जानकारी के अभाव और अंधविश्वास के कारण लोग अक्सर सांपों को देखते ही मार देते हैं, जबकि अधिकांश प्रजातियां इंसानों के लिए खतरनाक नहीं होतीं। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, सांप पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और कृषि में भी उनकी अहम भूमिका होती है।

झारखंड में अधिकांश सांप विषहीन

लोकसभा में उपलब्ध कराए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड में सांपों की 27 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से केवल छह प्रजातियां विषैली हैं, जबकि 21 प्रजातियां विषहीन मानी जाती हैं। वैश्विक स्तर पर भी सांपों की 3,500 से अधिक प्रजातियों में अधिकांश जहरीली नहीं हैं।

हाल के दिनों में दिखीं दुर्लभ प्रजातियां

इस वर्ष रांची और आसपास के क्षेत्रों में वन्यजीव बचाव दलों ने कई दुर्लभ प्रजातियों का सफल रेस्क्यू किया है। इनमें कॉपर हेडेड ट्रिंकेट (बसुंधरी), बैंडेड करैत, तक्षक, और अल्बिनो रैट स्नेक जैसे सांप शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का संकेत है।

कौन-कौन से जहरीले सांप मिलते हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड के विभिन्न इलाकों, विशेषकर रांची के आसपास, भारतीय नाग (कोबरा), कॉमन करैत, बैंडेड करैत, रसेल वाइपर और बम्बू पिट वाइपर जैसी विषैली प्रजातियां पाई जाती हैं। इनके काटने पर समय पर इलाज नहीं मिलने से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकता है।

वहीं धामण (रैट स्नेक), चेकर्ड कीलबैक, कुकरी स्नेक, वुल्फ स्नेक, लैंड बोआ, ब्रॉन्जबैक ट्री स्नेक, होरहोरा और अजगर जैसी प्रजातियां विषहीन होती हैं और सामान्यतः इंसानों पर हमला नहीं करतीं। कैट स्नेक और ब्राउन वाइन स्नेक हल्के विष वाले सांप माने जाते हैं, जिनका प्रभाव आमतौर पर मनुष्यों के लिए जानलेवा नहीं होता।

सर्पदंश होने पर क्या करें?

चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह है कि सांप के काटने की स्थिति में घबराने के बजाय मरीज को शांत रखें और प्रभावित अंग को जितना संभव हो स्थिर रखें। इसके बाद बिना समय गंवाए ऐसे अस्पताल ले जाएं, जहां एंटी-स्नेक वेनम (ASV) उपलब्ध हो।

विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि झाड़-फूंक, घाव पर चीरा लगाना, विष चूसने की कोशिश करना या अन्य पारंपरिक उपाय अपनाना खतरनाक हो सकता है। ऐसे तरीके वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं और मरीज की स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं।

पर्यावरण के लिए क्यों जरूरी हैं सांप?

वन विभाग और पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि सांप प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे खेतों में चूहों की संख्या नियंत्रित कर फसलों की सुरक्षा में मदद करते हैं और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसी वजह से सांपों की कई प्रजातियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता बढ़ाकर और सांपों से जुड़े मिथकों को दूर करके न केवल सर्पदंश से होने वाले जोखिम को कम किया जा सकता है, बल्कि जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिल सकती है।

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