Tuesday, October 27, 2026

बिहार म्यूजियम विश्व के टॉप 100 संग्रहालयों में 9वें स्थान पर, एशिया में बना नंबर 1.

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27 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS

पटना: बिहार के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गौरव से जुड़े बिहार म्यूजियम को लेकर बड़ी उपलब्धि का दावा किया गया है। जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के अनुसार, वर्ष 2026 में बिहार म्यूजियम को दुनिया के 100 बेहतरीन संग्रहालयों की सूची में नौवां स्थान और एशिया में पहला स्थान मिला है। इस उपलब्धि को उन्होंने बिहार के करीब 14 करोड़ लोगों के लिए गर्व का विषय बताया।

उमेश कुशवाहा ने इसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शी सोच और राज्य की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की उपलब्धियां बिहार की सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करती हैं।

नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट है बिहार म्यूजियम

बिहार म्यूजियम को राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों को आधुनिक तरीके से संरक्षित करने और प्रदर्शित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया। जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के मुताबिक, इस परियोजना की शुरुआत के लिए बिहार सरकार ने जुलाई 2011 में कनाडा की कंसल्टेंसी संस्था ‘लॉर्ड कल्चरल रिसोर्सेज’ के साथ समझौता किया था।

जून 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसकी आधारशिला रखी। इसके बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ा और वर्ष 2017 में संग्रहालय को राष्ट्र को समर्पित किया गया।

बिहार म्यूजियम आधुनिक वास्तुकला और ऐतिहासिक संग्रह के कारण राज्य के प्रमुख सांस्कृतिक स्थलों में गिना जाता है।

पटना म्यूजियम से जोड़ने के लिए बनेगी भूमिगत सुरंग

बिहार म्यूजियम को पटना म्यूजियम से जोड़ने की योजना भी राज्य की सांस्कृतिक विरासत को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

उमेश कुशवाहा के अनुसार, दोनों संग्रहालयों को जोड़ने के लिए लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग बनाने की परियोजना का शिलान्यास मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 3 मार्च 2026 को किया था।

इस परियोजना का उद्देश्य दोनों संग्रहालयों के बीच संपर्क को बेहतर बनाना और बिहार की ऐतिहासिक धरोहरों को देखने आने वाले लोगों के अनुभव को अधिक सुविधाजनक बनाना है।

हजारों वर्षों के इतिहास को समेटे हुए है बिहार म्यूजियम

बिहार म्यूजियम में राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी अनेक धरोहरें संरक्षित हैं। यहां की संग्रहित वस्तुएं प्राचीन भारत की कला, संस्कृति और ऐतिहासिक विकास की झलक प्रस्तुत करती हैं।

संग्रहालय की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं:

  • दीदारगंज यक्षी की प्रतिमा: प्राचीन भारतीय मूर्तिकला की प्रसिद्ध कलाकृति।
  • मौर्य, गुप्त और पाल काल की धरोहरें: विभिन्न ऐतिहासिक कालखंडों की कला और संस्कृति से जुड़ी वस्तुएं।
  • सम्राट अशोक और बौद्ध परंपरा से जुड़ी सामग्री: प्राचीन बिहार के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाने वाले संग्रह।
  • जैन परंपरा और मध्यकालीन इतिहास: बिहार की विविध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक।
  • शेरशाह सूरी और मुगल काल से संबंधित धरोहरें: अलग-अलग दौर के इतिहास को समझने में सहायक सामग्री।
  • चित्रकला, कांस्य और टेराकोटा कलाकृतियां: कला के विविध रूपों का संग्रह।
  • दुर्लभ सिक्के: ऐतिहासिक अर्थव्यवस्था और शासन व्यवस्था से जुड़े साक्ष्य।

इन संग्रहों के माध्यम से आगंतुक बिहार के अतीत और भारतीय इतिहास में उसके योगदान को समझ सकते हैं।

आधुनिक वास्तुकला भी है खास पहचान

बिहार म्यूजियम की पहचान केवल इसके ऐतिहासिक संग्रह तक सीमित नहीं है। इसकी आधुनिक वास्तुकला भी इसे विशिष्ट बनाती है। संग्रहालय को इस तरह विकसित किया गया है कि यहां ऐतिहासिक वस्तुओं के संरक्षण के साथ उन्हें व्यवस्थित ढंग से प्रदर्शित किया जा सके।

इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को बिहार के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराना और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को राज्य की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।

उमेश कुशवाहा ने विपक्ष पर साधा निशाना

बिहार म्यूजियम को मिली कथित अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग पर प्रतिक्रिया देते हुए जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने विपक्ष की राजनीति की आलोचना की।

उन्होंने कहा कि बिहार की नकारात्मक छवि पेश करने वाले राजनीतिक दलों को इस उपलब्धि से जवाब मिलता है। उनके मुताबिक, नीतीश कुमार के नेतृत्व में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रयासों से बिहार को वैश्विक पहचान मिल रही है।

कुशवाहा ने इस उपलब्धि को केवल संग्रहालय की सफलता नहीं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाला कदम बताया।

बिहार की सांस्कृतिक पहचान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि

बिहार का इतिहास प्राचीन सभ्यताओं, शिक्षा, धर्म, कला और स्थापत्य की समृद्ध परंपरा से जुड़ा रहा है। ऐसे में बिहार म्यूजियम जैसे संस्थान ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और नई पीढ़ी तक उनके महत्व को पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

हालांकि, विश्व में नौवें और एशिया में पहले स्थान की रैंकिंग के दावे की पुष्टि के लिए संबंधित अंतरराष्ट्रीय सूची और उसके मूल्यांकन मानदंडों की स्वतंत्र जांच जरूरी है।

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