Sunday, June 21, 2026

बिहार में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग होगा।

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बिहार में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग होगा। सभी 55,111 राशन दुकानों पर ई-पीओएस मशीनों को डिजिटल तौल मशीनों से जोड़ा जाएगा। AI अनाज वितरण का हिसाब रखेगा, जिससे गड़बड़ी रुकेगी और लाभार्थियों को सही मात्रा में राशन मिलेगा। फिंगरप्रिंट समस्या होने पर चेहरे और आंखों की पुतलियों से पहचान की व्यवस्था भी होगी।

पटना। बिहार में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गरीबों को बांटे जाने वाले अनाज के एक-एक दाने का हिसाब रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग होगा।

इससे जहां अनाज वितरण में गड़बड़ी रुकेगी, वहीं खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के पास यह रिकॉर्ड भी तैयार होगा कि दुकानों से कितना अनाज सही तरीके से बांटा गया।

इसके लिए विभाग पीडीएस की सभी 55,111 राशन दुकानों पर ई-पीओएस मशीनों को डिजिटल तौल मशीनों से जोड़ने की प्रक्रिया लागू की गई है। यही व्यवस्था 5000 नई राशन दुकानों में भी लागू होगी। नई दुकानों को खोलने हेतु सभी जिलाधिकारियों और अनुमंडल पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है।

खाद्य एवं आपूर्ति संरक्षण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक पीडीएस की तमाम राशन दुकानों में ई-पीओएस और तौल मशीनों का एकीकरण एक बहुप्रतीक्षित सुधार है,जिससे मैनुअल त्रुटियों को समाप्त किया जा सकेगा। लाभार्थियों की वास्तविक समय में पहचान की जा सकेगी और उन्हें उचित मात्रा में राशन मिलना सुनिश्चित किया जा सकेगा।

इससे राशन वितरण में और पारदर्शिता लायी जा सकेगी तो वहीं अनाज के लिकेज से लेकर अन्य शिकायतों पर रोक लगेगी। एआइ आधारित नई व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र लाभार्थी तकनीकी कारणों या संचालन संबंधी गड़बड़ियों के कारण राशन से वंचित न रहे।

”एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड” योजना के तहत सभी पात्र लाभार्थियों को बिना किसी देरी के राशन मिलना चाहिए। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को राशन देने से इनकार करने वाले उचित मूल्य दुकान संचालकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही, प्रत्येक दुकान पर डिस्प्ले बोर्ड पर इस योजना की पात्रता की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाएगी, ताकि प्रवासी लाभार्थियों को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। नई व्यवस्था से ई-पीओएस और तौल मशीनों के इस एकीकरण से प्रत्येक लेनदेन के दौरान वास्तविक समय में वजन का डेटा रिकॉर्ड करने में मदद मिलेगी।

इससे राशन की सही मात्रा का वितरण सुनिश्चित होगा, राशन स्टाक में हेराफेरी को रोका जा सकेगा और व्यवस्था में अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा।

AI की मदद से पकड़ी जाएगी चोरी

ई-पीओएस मशीनों को डिजिटल तौल मशीनों से जोड़े जाने के बाद प्रदेश भर से इसका रियल टाइम डाटा खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के पास पहुंचेगा। इस डाटा के साथ सर्वर पर खाद्यान्न का बाकी डाटा भी अपलोड होगा।. एआइ की मदद से इस डाटा का एनालिसिस होगा और जहां भी निर्धारित मात्रा से कम अनाज दिया जाएगा तो इससे जुड़ी सूचना अपने-आप कंट्रोल एंड कमांड सेंटर में जनरेट होगी।

फिंगरप्रिंट मिसमैच तो चेहरे से होगी पहचान

आमतौर पर यह शिकायत होती है कि उपभोक्ता के फिंगर प्रिंट पाश मशीनों में रीड नहीं हो रहे या हाथों की लकीरें मिट चुकी हैं। इस तरह की शिकायतों को देखते हुए अब इसका भी रास्ता निकाला गया है।

ऐसी स्थिति में आंखों की पुतलियों और फेस रिकग्निशन से भी पहचान स्थापित कर राशन दिया जाएगा। इसके लिए सभी राशन दुकानों में व्यवस्था की जा रही है।

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