Friday, October 2, 2026

बिहार में नौवीं कक्षा की नई किताबों का इंतजार, आधा सत्र बीता; अब ब्रिज कोर्स से पढ़ाई पूरी कराने की तैयारी.

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पटना: बिहार के सीबीएसई स्कूलों में कक्षा 9वीं के विद्यार्थियों के लिए बदला हुआ पाठ्यक्रम इस सत्र में चुनौती बन गया है। शैक्षणिक सत्र का करीब आधा हिस्सा बीतने और अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं पूरी होने के बाद भी कई विद्यार्थियों को नई पाठ्यपुस्तकें पूरी तरह उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। खासकर विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की पुस्तकों की उपलब्धता को लेकर परेशानी बनी हुई है।

स्थिति को देखते हुए कई स्कूल अब ब्रिज कोर्स के माध्यम से छूटे हुए पाठ्यक्रम को पूरा कराने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि अगले वर्ष दसवीं कक्षा में पहुंचने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

नए सिलेबस के साथ बढ़ी किताबों की समस्या

सीबीएसई और एनसीईआरटी की ओर से नौवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है। इसके चलते विद्यार्थियों को नए पाठ्यक्रम के अनुरूप पुस्तकों की आवश्यकता है। हालांकि, सत्र की शुरुआत में सभी विषयों की नई किताबें एक साथ उपलब्ध नहीं हो पाईं।

कुछ पुस्तकें जुलाई-अगस्त के दौरान विद्यार्थियों तक पहुंचीं, लेकिन विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की पुस्तकों की कमी के कारण शिक्षकों को वैकल्पिक सामग्री का सहारा लेना पड़ा।

गणित की दूसरी किताब मिलने के बाद भी परेशानी बरकरार

गणित की भाग-2 पुस्तक विद्यार्थियों को अर्द्धवार्षिक परीक्षा के बाद उपलब्ध कराई गई। दूसरी ओर विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तकों को लेकर अभी भी कई विद्यार्थियों को इंतजार करना पड़ रहा है।

इस वजह से शिक्षकों को उपलब्ध पुस्तकों, पुराने अध्ययन संसाधनों और अन्य शिक्षण सामग्री के बीच तालमेल बनाकर कक्षाएं संचालित करनी पड़ रही हैं।

दसवीं की पढ़ाई पर असर न पड़े, इसलिए ब्रिज कोर्स

नौवीं कक्षा के बाद विद्यार्थियों को दसवीं के बोर्ड स्तर की पढ़ाई की ओर बढ़ना होता है। ऐसे में यदि नौवीं का पाठ्यक्रम अधूरा रह जाता है, तो आगे की पढ़ाई में कठिनाई आ सकती है।

इसी को ध्यान में रखते हुए स्कूल ब्रिज कोर्स तैयार कर रहे हैं। इसके जरिये उन अध्यायों और अवधारणाओं को कवर करने की योजना है, जिनकी पढ़ाई नई किताबों के अभाव में प्रभावित हुई है।

कुछ स्कूलों में पुराने सिलेबस का सहारा

स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोगों के अनुसार, नई किताबें उपलब्ध नहीं होने के कारण कुछ संस्थानों में पुराने पाठ्यक्रम या उपलब्ध वैकल्पिक पुस्तकों की मदद से पढ़ाई कराई जा रही है। हालांकि, इससे नए पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई में एकरूपता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।

शिक्षकों को यह भी सुनिश्चित करना पड़ रहा है कि वैकल्पिक सामग्री के इस्तेमाल के बावजूद विद्यार्थियों को नए पाठ्यक्रम के जरूरी हिस्से समय पर समझाए जा सकें।

अभिभावकों ने सीबीएसई तक पहुंचाई शिकायत

पुस्तकों की उपलब्धता को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों की ओर से सीबीएसई को ई-मेल के माध्यम से शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सीबीएसई के काउंसलिंग सेल में भी नौवीं कक्षा से जुड़ी किताबों की समस्या को लेकर प्रतिदिन कई फोन आने की बात कही गई है।

बड़ी संख्या में विद्यार्थियों पर पड़ सकता है असर

उपलब्ध आंकड़ों में बिहार में नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों की संख्या करीब 1.5 से 2 लाख के बीच बताई गई है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह आंकड़ा केवल सीबीएसई विद्यार्थियों का है या इसमें अन्य बोर्ड के छात्र भी शामिल हैं।

पटना में भी कई सीबीएसई स्कूलों में नौवीं कक्षा के हजारों विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। ऐसे में नई पुस्तकों की उपलब्धता और पाठ्यक्रम पूरा कराने की चुनौती स्कूलों के साथ अभिभावकों के लिए भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।

अब किताबों की उपलब्धता और ब्रिज कोर्स पर नजर

नए शैक्षणिक सत्र के कई महीने बीत जाने के बाद भी सभी विषयों की पुस्तकें उपलब्ध नहीं होने से स्कूलों की पढ़ाई की योजना प्रभावित हुई है। अब ब्रिज कोर्स के जरिये छूटे हुए हिस्से को पूरा कराने की कोशिश की जा रही है।

आगे की पढ़ाई सुचारू रखने के लिए नई पुस्तकों की उपलब्धता के साथ-साथ ब्रिज कोर्स को प्रभावी तरीके से लागू करना महत्वपूर्ण होगा।

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